सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। बागरौद से पढ़िए, यह खबर…
बागरौद विदिशा। सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक तुम्हारे पास धन पैसा है तो ऐसे मित्र मिल जाएंगे जो तुम्हारे परम हितैषी बनेंगे और तुम्हारे अंदर बुरी आदतों का समर्थन करेंगे लेकिन, जैसे ही तुम्हारा धन समाप्त होगा और बुरा बक्त शुरु होगा तो वह तुमसे किनारा कर लेंगे लेकिन, जो तुम्हारे हितैषी मित्र भाई बंधु होते हैं। वह संकट आने पर तुम्हारा सहयोग भी करते हैं और तुम्हें महसूस भी नहीं होंने देते। इस विषय पर गुरुदेव कहते हैं कि ‘हमारे दोष जिनसे फले-फूले वे हमारे बंधु कैसे? मुनि श्री ने कहा कि व्यवहारिक जीवन में हमें अनेक लोगों के संपर्क और संसर्ग में रहना पड़ता है। जिन्हें अक्सर हम अपना मित्र या बंधु कहते हैं, लेकिन क्या वास्तव में वह हमारे सच्चे मित्र या बंधु हैं?
विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु
मुनि श्री ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि रक्त संबंधित भाई ही आपका बंधु है, कभी-कभी देखने में आता है कि जिससे हमारा कोई संबंध नहीं कोई स्वार्थ नहीं लेकिन, विपत्ति के समय पर हमारा ऐसा सहयोग दिया कि उससे रक्त से बढ़कर रिलेशन बन गया। मुनि श्री ने कहा कि सच्चा मित्र या बंधु बुराइयों में न तो खुद लगते हैं और न हीं दूसरों को लगने देते हैं। मुनि श्री ने कहा कि जो हमें दोषों और बुराइयों से बचाए और विपत्ति में साथ दे वही हमारा सच्चा मित्र है और जो विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु है।
मुनिश्री शनिवार को सुबह राहतगढ़ में करेंगे मंगल प्रवेश
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की राहतगढ़ में मंगल अगवानी 22 नवंबर को प्रातःकालीन बेला में होगी। आपके साथ मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक एवं बालब्रह्मचारियों का संघ है।यहां पर 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक नवीन जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव होने जा रहा है।













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