तीर्थ क्षेत्र कमेटियों की अगवानी से दर्शनोदय तीर्थ प्रसन्न है। तीर्थरक्षक हुकम काका को दिया तीर्थ सेनानी का दर्शनोदय कमेटी ने सम्मान किया। मुनिश्री सुधासागर जी ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सम्मेलन को संबोधित किया। थूवोन जी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
थूवोनजी। आज धर्म से सामाजिक संबंध रह गया है। समाजिक संबंधों में आपको ज्यादा कुछ नहीं मिलता। आप समाजिक कार्यों में कोई जिम्मेदारी नहीं निभाते, हर व्यक्ति कहता है कि तीर्थ हमारे हम जैन हैं। ये हमारे गुरु हैं, जब हमारे सामाजिक संबंध होगा तो आप कहेंगे क्या करें मंदिर में पानी चू रहा है। तीर्थ क्षेत्र पर अतिक्रमण हो रहा है, एक तीर्थ क्षेत्र लूट रहा है। एक तीर्थ क्षेत्र पर संकट आ रहा है तो हमें समाज की तरह नहीं कुटुम्ब की तरह मिलकर साथ देना चाहिए। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तब कहीं जाकर तीर्थ क्षेत्र सुरक्षित हो सकेंगे। इस कलिकाल में एकता में ही बल है और आचार्याे ने 2 हजार साल पहले लिखा भी है। कलऊ एकता बलाऊ इस कलिकाल में एकता ही बल है। वंदे भरत भारत्म इन सूत्रों को लेकर हम आगे चलें।
हुकम काका को प्रदान किया तीर्थ सेनानी सम्मान
इसके पहले तीर्थ क्षेत्र के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज भारत वर्ष की 20 कमेटी तीर्थ सम्मेलन में भाग ले रही हैं। हम सब का सौभाग्य है कि हमें मुनि पुंगवश्री सुधासागरजी महाराज का सतत् मार्ग दर्शन मिल रहा है। इस दौरान चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष हुकुम काका को तीर्थ सेनानी सम्मान से दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दददा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ. जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद, समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद आदि ने सम्मानित किया और उन्हें शॉल, श्रीफल पीत वस्त्र, पगड़ी माला भेंट की।
जिसका जन्म हुआ है उसे जाना पड़ेगा
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य पर्याय भी धोखा दे सकता है। ये पर्याय भी मिटेगा। इसलिए ये दुर्लभ मानव जन्म मिला है तो कुछ ऐसा करो कि ये जन्म मरण का चक्कर ही समाप्त हो जाए। ये पर्याय भी तो मिटाना ही है, जो उत्पन्न हुआ वह जाएगा। जिस जिसका जन्म हुआ है तो वह एक दिन मरेगा। मरण कोई बीमारी नहीं है ना कोई बीमारी से मरता। ये तो आपकी पर्याय की पूर्णता का संकेत है। इस बात को तो आप भी जानते हैं कि मृत्यु तो निश्चित है, इसलिए भगवान पर्यायों को अपने ज्ञान का विषय बनाते ही नहीं हैं।
जहां आंख उठाएं वह सब मेरे हो जाएं
मुनिश्री ने आगे कहा कि जहां आंख उठाएं सब मेरी जमीन हो, जहां मैं देखूं सबकुछ मेरा हा।े ऐसा हो सकता है, ऐसा भी हो सकता है। आप मित्र बनना चाहते हैं। संसार में जितने जीव हैं, वे सारे मेरे मित्र हैं। सारा संसार मेरा है और सारी दुनिया से रिलेशन सिप बनाएं। सारा संसार मेरा दोस्त । सारा सांसार मेरा कुटुम्ब है। राग को गाढ़ा करो। जितना बढ़ा सको बढ़ाओ। अपने कुटुम्ब से, परिवार से सबसे ज्यादा राग होता है। जैसे अपने कुटुम्ब में दुःख को देखकर आंख में आंसू आ जाते है। ऐसे ही संसार में किसी को भी दुःख आ जाए तो आपकी आंख में आंसू आ जाए।













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