समाचार

जैनाचार्यश्री जवाहरजी पर डाक टिकट और सिक्का जारी : विद्वत हस्तियों की मौजूदगी में आचार्यश्री का हुआ गुणानुवाद 


स्वतंत्रता सेनानी और आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए। उदयपुर से पढ़िए, यह खबर…


उदयपुर। स्वतंत्रता सेनानी और आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को भारत सरकार द्वारा स्मारक रजत सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए। भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से आचार्य जवाहरलाल पर 5 रुपए मूल्य का स्मारक डाक टिकट और वित्त मंत्रालय द्वारा 150 रुपए मूल्य वर्ग का सिक्का जारी किया। जसकरण बोथरा फाउंडेशन द्वारा मुंबई राजभवन में आयोजित विमोचन समारोह में महाराष्ट्र एवं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने स्मारक डाक टिकट जारी किया। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने स्मारक चतुर्थांश सिक्का जारी किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र शासन में कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और महाराष्ट्र डाक सर्कल के महानिदेशक अमिताभसिंह सहित समाज के अनेक गणमान्य महानुभाव उपस्थित थे। इस अवसर पर सरकार द्वारा जारी होने वाली विवरणिका में उदयपुर के साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग द्वारा लिखित आलेख का प्रकाशन किया गया है। आलेख में आचार्यश्री जवाहरजी के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा समाज व राष्ट्र के लिए उनके योगदान को दर्शाया गया है।

आचार्य श्री जवाहर भविष्य दृष्टा भी थे

श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र मुनि ने बताया कि आचार्य श्री जवाहर भविष्य दृष्टा भी थे। श्रमण संघ के तृतीय पट्टधर आचार्यश्री देवेंद्र मुनि जब आठ वर्ष के बालक थे, तब वर्ष 1939 आचार्यश्री जवाहर ने उदयपुर के पंचायती नाहरे में उन्हें देखकर कह दिया था कि यह बालक भविष्य में धर्माेद्योत करने वाला आचार्य बनेगा। डॉ. दिलीप धींग ने बताया कि आचार्यश्री जवाहर के उदयपुर में चार चातुर्मास हुए थे। उनके नाम से उदयपुर में जवाहर जैन विद्यालय और उदयपुर जिले के कानोड़ कस्बे में जवाहर विद्यापीठ चलता है। जवाहर विद्यापीठ से ग्रामीण क्षेत्र के हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षित बने हैं।

सत्संगों से आजादी के लिए किया जनजागरण 

श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र मुनि ने बताया आचार्य श्री जवाहरलाल ने देश पराधीनता में होने के समय 10 हजार से अधिक सत्संगों के माध्यम से जनजागरण किया। उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल और लोकमान्य तिलक जैसे नेताओं को स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरित किया।

सामाजिक कुरीतियों का किया विरोध 

आचार्यश्री जवाहरलालजी महाराज ने बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशाखोरी का दृढ़ विरोध किया। इस संदर्भ को स्मरण करते हुए राज्यपाल कटारिया ने कहा कि उनके नाम पर जारी यह स्मारक सिक्का और डाक टिकट लोगों को उनके कार्यों की चिरस्थायी याद दिलाते रहेंगे। ज्ञातव्य हो कि स्मारक सिक्के में अभी तक पूर्व में कुल सात सिक्के जैन संत समाज पर जारी हुए पर स्थानकवासी समाज में यह प्रथम मौका है जब स्थानकवासी जैन आचार्य जवाहरलाल पर स्मारक सिक्का जारी किया गया।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page