जैन धर्म की अनुपम कृति जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर अंकित करने की के लिए संकल्पित अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद (पंजीकृत) ने दुबई, अबू धाबी, नेपाल के बाद रविवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में विराजित जिन मंदिर जी के दर्शन किए। दिल्ली से पढ़िए, यह खबर…
दिल्ली। जैन धर्म की अनुपम कृति जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर अंकित करने की के लिए संकल्पित अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद (पंजीकृत) ने दुबई, अबू धाबी, नेपाल के बाद रविवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में विराजित जिन मंदिर जी के दर्शन किए। दिगंबर जैन फाऊंडेशन बैंकॉक के तत्वावधान में जैन ज्योतिष एवं वास्तु संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि जैन ज्योतिष अनादि काल से है और जैन ज्योतिष को अपनाकर जनमानस अपने जीवन में आई परेशानियों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। रवि जैन गुरुजी दिल्ली ने कहा कि नौ ग्रहों के अरिष्ट निवारक हमारे 24 तीर्थंकर हैं। उनकी पूजा-आराधना, प्रक्षाल, चालीसा आदि का पाठकर हम ग्रह नक्षत्र के नेगेटिव प्रभाव को कम कर सकते हैं।
संगोष्ठी में इनकी उपस्थिति सराहनीय रही
मुख्य वक्ता रवि जैन गुरुजी ने जैन धर्म को समर्पित आदिनाथ चैनल के बारे में समाज को जानकारी दी। साथ ही भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी, विश्व जैन संगठन, भारतीय जैन मिलन से भी जुड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर दिगंबर जैन फाउंडेशन बैंकॉक के गणमान्य पदाधिकारी महावीर जैन बड़जात्या, सुधांशु जैन, वंदना जैन, आयुषी जैन, सविता जैन, कविता जैन बडजात्या, अर्पित जैन, सोनल जैन, परु जैन, पं.आयुष जैन दिल्ली से आभा जैन, आशा भाटिया, शीला जैन, शिवानी जैन मुंबई से तरस जैन, लीला जैन आदि उपस्थित थे।
गुरुजी को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया
दिगंबर जैन फाउंडेशन बैंकॉक के सदस्यों ने इस अवसर पर रवि जैन गुरुजी को सपत्नी स्मृति चिन्ह भंेटकर उनका स्वागत सम्मान किया। साथ ही अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद (पंजीकृत) की ओर से रवि जैन गुरुजी ने भी समाज को एक प्रशस्ति पत्र सौंपा। प्रशस्ति पत्र ग्रहण करने के बाद समाज ने कहा कि यह प्रशस्ति पत्र मंदिर जी में यथायोग्य स्थान पर स्थापित किया जाएगा।
बैंकॉक पधारने का आग्रह
कार्यक्रम के बाद पदाधिकारियों के साथ रवि जैन गुरुजी ने थाई जैन संगठन देरासर बैंकॉक (ओसवाल जैन समाज) के तत्वावधान में नवनिर्मित भव्य श्री देरासर के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त किया। समाज के पदाधिकारी देवांग संघवी के निवास पर संध्याकालीन बेला में वास्तु, ज्योतिष चर्चा के बाद प्रशस्ति पत्र भेंट किया। देवांग संघवी ने भविष्य में जल्द ही परिषद् के सदस्यों के साथ पुनः बैंकॉक पधारने का निवेदन किया।













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