शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई। विदिशा से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर…
विदिशा। शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई एवं शंका समाधान तथा रात्रि विश्राम पारस गार्डन सलामतपुर में होकर रविवार को प्रातः प्रवचन सांची दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः8:30 बजे हुए। आहार चर्या उपरांत दोपहर एक बजे सांची से मंगल विहार होकर तीन बजे ईदगाह चौराहे से सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा मंगल अगवानी की जाएगी। मुनिसंघ शीतलधाम पर पहुंचेंगे एवं विदिशा नगर में विराजमान
मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ससंघ के साथ गुरु भाईओं का मंगल मिलन होगा। सांयकालीन विश्वप्रसिद्ध शंकासमाधान 6:20 से 7.15 बजे तक शीतलधाम पर होगा।
हमें अपने आत्मस्वरूप का ज्ञान और बोध ही नहीं
इधर, ज्ञानोदय तीर्थ दीवानगंज में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि जीवन उन्हीं का ऊंचा उठता है,जो अपने आपको आगे बढ़ाने के लिये संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने आपसे प्रश्न करो मैं कौन हूं, मेरा क्या है? मैं क्या कर रहा हूं? और मुझे क्या करना चाहिये? उन्होंने कहा कि हमें अपने आत्मस्वरूप का ज्ञान और बोध ही नहीं है। इसलिये जो मैं हूं इसे जानते नहीं, बहुत थोड़े से लोग है, जो अपने जीवन और जीवन के मर्म को पहचानते हैं।
यह शरीर एक चोले के समान है
मुनि श्री ने कहा कि आचार्य कुंद-कुंद स्वामी कहते है कि मैं एक शुद्ध चेतन आत्मा हूं, यह शरीर एक चोले के समान है। यह जो परिचय दिया जा रहा है, वह मैं नहीं वह संसार को भटकाने वाला है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे व्यक्ति नशे की हालत में होता है तो उसे कोई सुधबुध नहीं रहती। उससे भी खराब नशा मोह का होता है, जिसमें मनुष्य अपनी सुधबुध भूल जाता है।













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