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संयम साधना के बिना अनुष्ठान सार्थक नहीं – मुनिश्री विलोकसागर, सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ : मुरैना बड़े जैन मंदिर में ध्वजारोहण, घटयात्रा और आठ अर्घ्यों के साथ आरंभ हुआ महाविधान


बड़े जैन मंदिर मुरैना में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ मुनिश्री विलोकसागरजी के प्रवचन, ध्वजारोहण और घटयात्रा के साथ हुआ। संयम साधना के महत्व पर विस्तृत संदेश दिए गए और प्रथम दिवस आठ अर्घ्य समर्पित किए गए। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


मुरैना के बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के शुभारंभ अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन दर्शन में संयम साधना सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि संयमी व्यक्ति अपने व्यवहार और आचरण से सम्मान प्राप्त करता है, जबकि असंयमी व्यक्ति अपमानित होता है। धार्मिक अनुष्ठानों के सार्थक परिणाम तभी प्राप्त होते हैं जब व्यक्ति संयम का पालन करे। मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि संयम का अर्थ केवल बाहरी नियंत्रण नहीं, बल्कि मन, इंद्रियों और भावनाओं पर स्व-नियंत्रण है। यह मनुष्य को शांति, विवेक और आत्मबल प्रदान करता है तथा मोक्ष मार्ग का आधार है।

ध्वजारोहण और घटयात्रा के साथ अनुष्ठान की शुरुआत

आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण, ध्वजारोहण और भव्य घटयात्रा के साथ हुआ। पुण्यार्जक परिवार कैलाशचंद राकेशकुमार जैन पूणारावत के निवास से पूजन सामग्री गाजेबाजे के साथ बड़े जैन मंदिर लाई गई। चांदी के हार, मुकुट और विशेष पूजन वस्त्रों से सुसज्जित इन्द्रों ने मंत्रोच्चारण करते हुए प्रारंभिक क्रियाओं को सम्पन्न किया। सौभाग्यवती महिलाओं ने कलशों में लाया गया शुद्ध जल भूमि एवं मंडप की शुद्धि हेतु उपयोग किया।

भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में श्रीफल समर्पित कर लिया आशीर्वाद

प्रमुख प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी के नेतृत्व में पुण्यार्जक परिवार ने बड़े जैन मंदिर के मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के श्री चरणों में श्रीफल अर्पित कर विधान की स्वीकृति ग्रहण की तथा निर्विघ्न सम्पन्नता हेतु आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के श्री चरणों में भी श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

प्रथम दिवस आठ अर्घ्य समर्पित, दूसरे दिन होंगे 48 अर्घ्य

अनुष्ठान के प्रथम दिवस प्रातःकालीन बेला में जलाभिषेक, शांतिधारा और नित्य महापूजन के पश्चात प्रारंभिक विधान क्रियाएं सम्पन्न की गईं। सिद्धों की आराधना में आठ अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान के दूसरे दिन सोलह और बत्तीस मिलाकर कुल अड़तालीस अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।

भक्ति संगीत से गूंजा मंदिर परिस

भोपाल के प्रसिद्ध भजन गायक नीलेश जैन एंड पार्टी ने अपनी मधुर भक्ति प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति रस की धारा बहती रही।

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