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दो दृष्टिहीनों के जीवन में रोशनी भर गए नरेश जैन : मरकर भी अमर हो गए, नेत्रदान से दो जीवनों में उजाला कर गए कुचामन के नरेश जैन 


कुचामन सिटी निवासी नरेश कुमार जैन (डोसी) ने मृत्यु के बाद नेत्रदान कर दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश भर दिया। महावीर इंटरनेशनल की प्रेरणा से किया गया यह नेक कार्य मानवता की सच्ची मिसाल है। पढ़िए वीर सुभाष पहाडिया की रिपोर्ट…


कुचामन सिटी के आथुना दरवाजा निवासी नरेश कुमार जैन (डोसी) उम्र 55 वर्ष का आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन के पश्चात परिवार ने महावीर इंटरनेशनल कुचामन सिटी की प्रेरणा से नेत्रदान का निर्णय लिया। धर्मपत्नी कंचन देवी, पुत्र वीर प्रियांशु, बेटियाँ पूजा अर्पित, अनिता पुलकित जैन, और परिवार के सदस्य वीर गौरव, सुनिल, वीर प्रवीण डोसी ने “जीवो और जीने दो” की भावना को साकार करते हुए मानवता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

महावीर इंटरनेशनल की सूचना पर जेएलएन अस्पताल अजमेर के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. भरत शर्मा की टीम ने रात्रि 1:30 बजे नेत्रदान प्रक्रिया पूरी की। इस पुनीत कार्य में वीर सुभाष पहाड़िया, अजमेर जोन सचिव वीर कैलाश पांड्या, अध्यक्ष वीर रामावतार गोयल, सचिव वीर अजित पहाड़िया, वीर शुभम जैन, वीर उत्कर्ष और अमन जोशी ने सक्रिय सहयोग दिया।

परिवार द्वारा डॉक्टर भरत शर्मा को दोनों नेत्र सुपुर्द किए गए, जिससे दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आएगी। यह नेत्रदान नरेश कुमार जैन की अमर विरासत बनकर समाज में सेवा और करुणा का संदेश देता रहेगा।

संस्था सदस्यों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और डोसी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने मानवता की इस अद्वितीय मिसाल को जीवंत किया।

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