धार शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। धार से पढ़िए, साभार यह खबर…
धार। शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। कार्यक्रम का आरंभ अद्विता व अद्वेत के मंगलाचरण नृत्य से हुई। इसके बाद छाबड़ा परिवार ने आचार्यश्री के चित्र का अनावरण कर द्वीप प्रज्वलन किया। पाद प्रक्षालन कर उन्हें जिनवाणी भेंट की गई। आचार्यश्री के जीवन प्रसंग के बारे में बताया गया कि वे मात्र 17 वर्ष की आयु में गृह त्यागर कर संयम के मार्ग पर चले थे। 1983 में दीक्षा धारण की और 1992 में आचार्य पद आदि की विभिन्न ऐतिहासिक घटनाएं सामने आईं।
आचार्यश्री ने तीन सौ से अधिक संयमियों को दीक्षा प्रदान की और 170 मुनि वृतियों को सल्लेखना समाधि करवाई। आज उनके शिष्य पूरे देश में जैन धर्म की प्रभावना और प्रचार-प्रसार में अनवरत लगे हैं। छाबड़ा परिवार ने चातुर्मास में मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य प्राप्त किया था। इस अवसर पर उन्होंने गुरुदेव की सेवा में विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम में समाज अध्यक्ष श्रेणिक गंगवाल, सचिव संजय छाबड़ा सहित अन्य समाजजन और गुरु भक्त मौजूद रहे।













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