मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में बाबड़ियाकलां दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। इस अवसर पर कमेटी के पदाधिकारियों ने उनका पाद प्रक्षालन किया एवं आरती उतारी। प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद एवं विद्या प्रमाण साधु वसतिका गृह का शिलान्यास किया गया। भोपाल से पढ़िए, यह खबर…
भोपाल। आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी के परम प्रभावक शिष्य गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में बाबड़ियाकलां दिगंबरा जैन मंदिर पहुंचे। इस अवसर पर कमेटी के पदाधिकारियों ने उनका पाद प्रक्षालन किया एवं आरती उतारी। प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद एवं विद्या प्रमाण साधु वसतिका गृह का शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि यह बाबड़ियाकलां वालों की गुरु भक्ति का ही प्रताप है कि बार-बार संत के चरण आपके यहां पर पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जब में पिछली बार यहां आया था तो आप लोगों को संत निवास बनाने की प्रेरणा दी थी। जिसे आप लोगों ने तुरंत संत निवास की नींव रखकर यह बहुत बड़े पुण्य का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर संतों का आवागमन लगा रहता है उस स्थान पर जैन संस्कृति और संस्कार पलते हैं। उन्होंने उन सभी सौभाग्यशाली परिवारों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि दिगंबर जैन परंपरा में साधु वसतिका का बहूत बड़ा महत्व है। उस परंपरा को आप लोगों ने मिलकर आगे बढ़ाया है। सभी परिवार आशीर्वाद के पात्र हैं। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि मुनिसंघ दोपहर में मंगल विहार करके अवधपुरी पहुंचे एवं सांयकालीन शंका समाधान कार्यक्रम हुआ।













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