टोंक में आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तक का विमोचन वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में हुआ। डॉ. सुनील जैन संचय द्वारा संपादित यह पुस्तक जैन समाज की आस्था और तप परंपरा का प्रतीक बनी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
ललितपुर। बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य, चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी वर्ष पर उनके व्यक्तित्व–कृतित्व पर आधारित पुस्तक का भव्य विमोचन टोंक (राजस्थान) में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण ग्रंथ का संपादन डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर ने किया है।
पुस्तक में देशभर के प्रतिष्ठित जैन विद्वानों, मनीषियों, और आचार्यों के आलेख शामिल हैं। विमोचन समारोह में डॉ. शीतलचंद्र जैन, डॉ. श्रेयांस कुमार जैन, प्रो. फूलचंद्र प्रेमी, प्रो. जयकुमार जैन, डॉ. आनंद प्रकाश जैन, डॉ. पंकज जैन, और अन्य अनेक विद्वान उपस्थित रहे।
आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि “आचार्य शांतिसागर जी श्रमण परंपरा के पितामह हैं। वे आत्मविद्या के महाज्ञानी और अनासक्ति के प्रतीक थे।” मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने बताया कि उन्होंने मुनिचर्या का पुनरुत्थान, चतुर्विध संघ की स्थापना और जिनालयों के संरक्षण जैसे ऐतिहासिक कार्य किए।
इस अवसर पर संपादक डॉ. सुनील संचय को आचार्यश्री के करकमलों से आशीर्वाद प्राप्त हुआ तथा जैन समाज टोंक द्वारा पुष्पमाला, प्रमाणपत्र और साहित्य भेंटकर उनका सम्मान किया गया। यह आयोजन समाज के लिए श्रद्धा, गौरव और प्रेरणा का भावनात्मक संगम बन गया।













Add Comment