सनावद के श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में अष्टानिका पर्व के तृतीय दिवस युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में णमोकार मंत्र विधान रचाया गया, जिसमें 150 अर्घ्य समर्पित किए गए। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…
सनावद। नगर के श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे अष्टानिका पर्व के तृतीय दिवस कार्तिक शुक्ल ग्यारस के अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में णमोकार मंत्र विधान का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें कुल 150 अर्घ्य समर्पित किए गए।
सन्मति जैन काका ने बताया कि यह विधान रचाने का सौभाग्य श्रीमती रेखा राकेश जैन, अंजू पाटनी, जयश्री जैन और सुबोधबाई जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिराज ने विधान के दौरान प्रत्येक अर्घ्य का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए णमोकार मंत्र की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि णमोकार मंत्र जैन धर्म का सार है, जो पाँच परमात्माओं को नमन कर आत्मा को पवित्रता और शांति की ओर अग्रसर करता है। इसके जाप से मन में सकारात्मकता आती है और करुणा की भावना प्रबल होती है।
वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत माहौल
इसी क्रम में रात्रि में आचार्य भक्ति, गुरुवंदना, श्रीजी की आरती और धार्मिक क्लास का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नीतू जैन, सोनम जैन, राजकुमारी जैन, साधना जैन, चंदा पाटनी, पुष्पा जैन, हीरामणि भूच, सुनीता पाटनी, अचिंत्य जैन, प्रशांत जैन, नरेंद्र काकू सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे। इस आयोजन से संपूर्ण वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत माहौल निर्मित हुआ।













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