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गोमटगिरी बनेगा संयम का साक्षी — 10 दीक्षार्थी अपनाएँगे आत्मकल्याण का मार्ग : जानिए वह कौन है 10 आत्माएं 


इंदौर के गोमटगिरी तीर्थ पर 2 नवंबर को आचार्य विभव सागर महाराज के सान्निध्य में 10 दीक्षार्थी गृहस्थ जीवन त्यागकर संयम और आत्मकल्याण की राह पर चलेंगे। यह अवसर पूरे जैन समाज के लिए गौरव का क्षण होगा।संपादक रेखा जैन की प्रस्तुति


इंदौर। दिगंबर जैन समाज के लिए एक बार फिर से इतिहास रचने का समय आ गया है। गोमटगिरी तीर्थक्षेत्र पर आगामी 2 नवंबर को एक ऐसा दृश्य देखने को मिलेगा, जहाँ भक्ति, भाव और संयम का संगम होगा। आचार्य विभव सागर महाराज के पावन सान्निध्य में 10 दीक्षार्थी गृहस्थ जीवन को त्यागकर आत्मकल्याण की राह पर कदम बढ़ाएँगे।

इनमें 9 महिलाएँ और 1 पुरुष शामिल हैं जो अपने मोह-माया से मुक्त होकर संयम का व्रत धारण करेंगे। यह दीक्षा केवल वस्त्र परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मा के पुनर्जागरण की घोषणा है।

संयम, त्याग और आत्मकल्याण की प्रेरक यात्रा इस दीक्षा समारोह में सबसे वरिष्ठ दीक्षार्थी होंगी कोकिलाबेन (जन्म 2 सितंबर 1950, अहमदाबाद), जबकि सबसे कनिष्ठ होंगी राजश्री गुड़िया (जन्म 10 अप्रैल 1995, छिंदवाड़ा)।

दीक्षार्थियों के नाम इस प्रकार हैं — क्षुल्लिका आराधना श्री (10 अगस्त 1977)

ब्रह्मचारी सुनील जैन (19 दिसंबर 1967)

ब्रह्मचारिणी राजश्री दीदी (10 अप्रैल 1995)

ब्रह्मचारिणी मीनू दीदी (6 जुलाई 1976)

ब्रह्मचारिणी ट्विंकल दीदी (7 सितंबर 1992)

ब्रह्मचारिणी जयश्री दीदी (9 सितंबर 1961)

ब्रह्मचारिणी रेखा दीदी (1962)

ब्रह्मचारिणी सविता दीदी (1 सितंबर 1968)

ब्रह्मचारिणी कोकिलाबेन (2 सितंबर 1950)

ब्रह्मचारिणी चंद्रकला देवी (7 नवंबर 1957)

इन दीक्षार्थियों की जीवन यात्रा केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि संस्कार, संयम और साधना की साधना है। उनके इस निर्णय ने समाज में प्रेरणा की नई लहर जगा दी है।

गोमटगिरी पर इस दिन हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे। भक्ति भरे गीत, संयम की वाणी और आचार्य श्री का उपदेश वातावरण को भावमय बना देंगे।

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