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आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला, मड़ावरा का वार्षिकोत्सव भव्य रूप से सम्पन्न : नि:शुल्क धार्मिक शिक्षा प्रदान करने पर शिक्षिकाओं को विशेष सम्मान


मड़ावरा में आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला का वार्षिकोत्सव भक्ति, उल्लास और संस्कार की अनूठी छटा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को भावविभोर कर दिया। पाठशाला की शिक्षिकाओं को नि:शुल्क धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के लिए सम्मानित किया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


मड़ावरा (ललितपुर) में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की प्रेरणा एवं निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर महाराज के निर्देशन में संचालित आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला का वार्षिकोत्सव भक्ति, उल्लास और संस्कार की अनूठी छटा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के पूर्व आचार्यश्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन अविनाश और अनिमेष जैन बम्हौरी परिवार ने किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रंखला में मंच पर नन्हें-मुन्हें बच्चों की मासूम ऊर्जा और भक्ति ने ऐसा संगम रचा कि पूरा सभागार भावविभोर हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत मंगल प्रस्तुति एवं मंगलाचरण से हुई, जिसमें समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज की महाप्रयाण शोभा यात्रा की झांकी ने सभी की आंखें नम कर दीं। उनके समाजहितकारी कार्यों और सहयोगी संस्थाओं पूर्णायू, प्रतिभास्थली और हथकरघा की प्रेरक झलकियों ने समर्पण और सेवा की भावना को जीवंत किया।

तत्पश्चात बच्चों की भक्ति प्रस्तुति “आओ रे आओ रे विद्यासागर मेरे आंगणा” ने वातावरण को श्रद्धामय बना दिया। सफेद परिधान में छोटे बच्चों का गीत “तुझ में रब दिखता है” मासूम भक्ति और कोमल भावनाओं का प्रतीक बना। राजस्थानी परिधान में प्रस्तुत कव्वाली “कामयाबी मिसाल है, कमाल की राष्ट्र प्रेम” ने देशभक्ति और जोश का रंग भरा। बालिकाओं की राजस्थानी थीम प्रस्तुति “आओ पधारों हे जिन भगवान -मंगल घड़ी जिन दर्शन की” ने दर्शकों को भक्ति रस में सराबोर किया।

सबसे छोटे कलाकारों का गीत “आओ जी आओ जी महावीर मोरे आँगणा” और सामूहिक प्रस्तुति “लहरा दो जिनशासन का परचम लहरा दो” ने पूरे सभागार में आनंद और उत्साह की लहर दौड़ा दी। कार्यक्रम का समापन बच्चों द्वारा प्रस्तुत भावनापूर्ण लघु नाटिका से हुआ, जिसमें सेवा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को जीवंत अभिनय के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया।

कार्यक्रम का संचालन पाठशाला की शिक्षिकाओं ने सौहार्दपूर्ण और प्रेरक ढंग से किया। दर्शकों ने सभी प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह वार्षिकोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि संस्कार, भक्ति और आत्मिक ऊर्जा का उत्सव था।

संकल्प: महाराज के आदर्शों को बाल शिक्षा और संस्कार के हर क्षेत्र में जीवित रखेंगे

समापन पर पाठशाला परिवार ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए संकल्प लिया कि वे आचार्य विद्यासागर महाराज के आदर्शों को बाल शिक्षा और संस्कार के हर क्षेत्र में जीवित रखेंगे।

इस अवसर पर पाठशाला की प्राचार्या ममता जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश के अशोकनगर में मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के पावन सानिध्य में देशभर की लगभग चार सौ पाठशालाओं का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ, जिसमें मड़ावरा पाठशाला को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। पाठशाला की शिक्षिका रीना जैन एवं अनोखी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर पाठशाला का नाम रोशन किया। कार्यक्रम में नीलेश जैन, अभिषेक जैन और रानू जैन का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन चेतन जैन ने किया।

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