श्रवण बेलगोला (कर्नाटक) के भट्टारक श्री चारुकीर्ति जी टोंक पहुंचे, जहां उन्होंने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन कर चरण प्रक्षालन किया और रजत प्रतिमा भेंट की। उन्होंने बाहुबली भगवान के आगामी महामस्तकाभिषेक 2030 की तैयारियों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
टोंक। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन करने हेतु श्रवण बेलगोला (कर्नाटक) के भट्टारक श्री चारुकीर्ति जी आज टोंक पधारे।
भट्टारक जी ने श्रीफल, पुष्प और सूखे मेवों से आचार्य श्री की अर्चना कर चरण प्रक्षालन किया और प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की रजत प्रतिमा उन्हें भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री से विभिन्न धार्मिक विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
भट्टारक श्री के साथ प्रथमाचार्य शांति सागर फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनिल सेठी (बैंगलोर) सहित जयपुर से आए अनेक पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
श्रवण बेलगोला में प्रत्येक 12 वर्ष में भगवान बाहुबली का महामस्तकाभिषेक आयोजित किया जाता है, जो आगामी वर्ष 2030 में संपन्न होगा। पूर्व में वर्ष 1993, 2006 और 2018 के तीनों महामस्तकाभिषेक आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुए थे।
भट्टारक जी के आगमन पर टोंक नगर जैन समाज ने नगर की गरिमा के अनुरूप भव्य स्वागत किया। बाल ब्रह्मचारी गज्जू भैयाजी सहित संघ के अनेक सदस्यों ने पूज्य भट्टारक जी का अभिनंदन किया।
यह भेंट केवल एक धार्मिक अवसर नहीं रही, बल्कि दो महान जैन परंपराओं के मध्य आध्यात्मिक संवाद और गुरु परंपरा के प्रति समर्पण का जीवंत प्रतीक बन गई।













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