समाचार

अहंकार प्रभु का नहीं होने देता : मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बाबड़ीकला में दी अहंकार छोड़ने की सीख


बाबड़िया कला दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि अहंकार प्रभु चरणों में झुकने के बाद भी प्रभु का नहीं होने देता। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की खबर…


भोपाल। बाबड़िया कला दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि अहंकार प्रभु चरणों में झुकने के बाद भी प्रभु का नहीं होने देता। ‘मैं कुछ हूं, यह मंदिर मेरा है, यह मेरे भगवान हैं, मैं पदाधिकारी हूं कि ऐसी अकड़ श्रद्धा को कमजोर करती है। मुनिश्री ने कहा कि विनम्र व्यक्ति श्रद्धाशील होता है। झुकने में उपलब्धि है जबकि, झुकाने में पीड़ा। जो झुकना जानता है, सृष्टि उसके चरणों में न्योछावर हो जाती है, और जो दूसरों को झुकाना चाहता है, सृष्टि उसे उखाड़कर फेंक देती है। पति-पत्नी के प्रसंग से उदाहरण देते हुए मुनिश्री ने बताया कि यदि मन नहीं झुका तो जीवन में संघर्ष और कटुता बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि काल्पनिक छवि को अपनी मान लेना अज्ञानता है। ‘मैं क्यों झुकूं यही जीवन की विडंबना है जबकि, झुकने की कला से जीवन कभी रुकता नहीं। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिसंघ का मंगल विहार ‘संस्कार उपवन प्राइड’ की ओर हुआ है। यहां तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम में प्रातः प्रवचन 8:30 बजे और सायं शंका-समाधान 6:20 बजे होंगे।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
1
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page