झुमरीतिलैया (कोडरमा) में दसलक्षण पर्यूषण के आठवें दिन “उत्तम त्याग धर्म” का आयोजन भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में त्याग को जीवन कल्याण और शांति का मूल बताया। मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। पढ़िए राजकुमार अजमेरा की पूरी रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया। जैन धर्म का पर्वाधिराज दसलक्षण पर्यूषण का आठवां दिन “उत्तम त्याग धर्म” के रूप में श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। धर्मसभा में प्रवचन देते हुए डॉ. निर्मला दीदी ने कहा कि त्याग धर्म ही जीवन को पूज्य बनाता है। संग्रह जीवन को दुखमय बनाता है, जबकि त्याग से शांति और संतोष मिलता है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन त्याग की संस्कृति पर आधारित है और यही हमारी भारतीय पहचान है।
प्रातःकाल नए मंदिर में महाशांतिधारा का आयोजन हुआ, जिसमें भगवान पार्श्वनाथ, अनंतनाथ और आदिनाथ भगवान का मंगल विहार एवं शांतिधारा विभिन्न जैन परिवारों – छाबड़ा, पाटोदी, सेठी, बाकलीवाल और चूड़ीवाला परिवार – के सौभाग्य से संपन्न हुई।
ज्ञान बढ़ाओ प्रतियोगिता” का आयोजन
शाम को भव्य आरती और “ज्ञान बढ़ाओ प्रतियोगिता” का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता का संचालन अक्षय-सोना जैन गंगवाल और मोहित-निकिता जैन सोगानी ने किया। प्रतियोगियों को सुरेश-सिद्धार्थ जैन सेठी परिवार की ओर से पुरस्कृत किया गया। इस धार्मिक आयोजन की जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने दी। समाज ने इसे अनुमोदना के साथ हर्षपूर्वक स्वीकार किया।













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