मुरैना के बड़े जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म का महत्व समझाया गया। मुनिश्री विलोकसागर ने सत्य बोलने और आत्मा की पवित्रता पर जोर दिया। छठवें दिन धूप दशमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसमें जैन महिलाएं व्रत रखेंगी और सुहाग रूपी शुभ बस्तुएं एक-दूसरे को देंगी। पढ़िए मनोज जैन नायक की खास रिपोर्ट…
मुरैना। जैन धर्म में जिनेंद्र प्रभु की वाणी को जिनवाणी या आगम कहा गया है। दसलक्षण महापर्वों के दौरान उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्ज़व, उत्तम शौच के बाद पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म का महत्व बताया जाता है। मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सत्य बोलने वाला व्यक्ति शांति और सुखमय जीवन व्यतीत करता है। सत्य धर्म न केवल सच बोलने का नियम है, बल्कि मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का मार्ग भी है। सत्य धर्म व्यक्ति को पापों से बचाकर पुण्य की ओर ले जाता है और उसे मानसिक सुख तथा सम्मान प्रदान करता है। इसका पालन करने से व्यक्ति दूसरों के विश्वास का पात्र बनता है और जीवन में गौरवशाली बनता है।
स्वर्ण कलश से अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन
छठवें दिन धूप दशमी का पर्व मनाया जाएगा। जैन धर्मावलंबी जिनालयों में दर्शन करेंगे और शुद्ध सुगंधित धूप अर्पित करेंगे। साथ ही, सभी सौभाग्यशाली जैन महिलाएं व्रत रखेंगी और सुहाग रूपी शुभ बस्तुएं एक-दूसरे को प्रदान करेंगी। दसलक्षण महापर्व के पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। रात्रि को शास्त्रसभा में विद्वत नीरज जैन शास्त्री ने कषाय और आत्मा की पवित्रता पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सत्य धर्म केवल सच बोलना नहीं, बल्कि आत्मा का स्वभाव है, जो हमें परम गति की प्राप्ति में सहायक होता है।













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