श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर धर्म सभा को मुनिश्री गुरुदत्त सागर जी ने संबोधित किया। सायंकाल मंदिर में पाठशाला के बच्चों द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे हैं। जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाएं मौजूद थी। महरौनी से पढ़िए, यह खबर…
महरौनी। श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री गुरुदत्त सागर ने कहा कि हमें किसी भी चीज पर अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि, हमारे पास जो भी है जैसे धन-दौलत ,ज्ञान, कुल, शरीर ,रूप और संबंध आदि सभी वस्तुएं नश्वर है स्थाई नहीं है और जब मनुष्य को यह समझ आता है तो उसका अहंकार समाप्त हो जाता है और उस व्यक्ति में विनम्रता आ जाती है। यही भाव उत्तम मारदव धर्म कहलाता है।
मुनि श्री मेघ दत्त सागर जी ने कहा कि मनुष्य में नम्रता ,करुणा और उदारता का भाव ही उत्तम मारदव है जो घमंड को त्यागने और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता रखने से आता है और व्यक्ति को विनम्र एवं दयालु बनाता है। जिससे वह दूसरों के दुख को समझता है और उनकी मदद करता है और जहां विनम्रता नहीं है। वहां तीर्थ यात्रा, व्रत ,उपवास ,ध्यान आदि करना सब व्यर्थ है। सायंकाल मंदिर में पाठशाला के बच्चों द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे हैं। जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाएं मौजूद थी।













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