नगर में मुनिराजों के चातुर्मास के दौरान धर्मप्रभावना खूब बह रही है। नित पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, आराधना सहित प्रवचन आदि हो रहे हैं। मंगलवार को मुनिश्री जयंतसागर जी महाराज के प्रवचन हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गुरु भक्त मौजूद रहे। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर..
नांद्रे। नगर में मुनिराजों के चातुर्मास के दौरान धर्मप्रभावना खूब बह रही है। नित पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, आराधना सहित प्रवचन आदि हो रहे हैं। मंगलवार को मुनिश्री जयंतसागर जी महाराज के प्रवचन हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गुरु भक्त मौजूद रहे। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने कहा कि आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में वर्षायोग वास कर रहे हैं। मुनि श्री जयंत सागरजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जीवन में कभी भी किसी को सुधारने का प्रयास मत करो क्योंकि, आप सुधरने को कहोगे सामने वाले ने आपकी बात नहीं मानी तो विकल्प होगा। परिणाम संक्लेशित होंगे और क्रोध भी आ सकता है। भाव भी खराब होंगे।
इसलिए कभी किसी के आप मत बनिए क्योंकि कोई किसी को नहीं सुधार सकता। बडे़ से बडे़ महापुरुष हुए हैं।महान साधु हुए कोई किसी को नहीं सुधार पाया, अधूरा ही छोड़कर जाना पड़ा। अगर परिणाम सही रखना है तो मात्र उपदेश करो, बोल दो सामने वाला माने या न माने वह उसकी मर्जी।
उसकी वजह से अपना जीवन और समय मत खराब करो क्योंकि, समय बहुत कीमती है। सुधारने का नहीं सुधरने का प्रयास करो खुद हम सुधर जाएंगे तो सब सुधरे ही दिखेंगे। आचार्य भगवन विशुद्ध सागर जी ने सूत्र दिया है कि ‘देखो, जानो, जाने दो’जो जैसा कह रहा है, उसको देख लो समझा दो अगर समझे तो ठीक, नहीं तो जाने दो आप मस्त और स्वस्थ्य रहो। जो है सौ है।













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