आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में जारी है। यहां पर विराजित मुनिराजों की नित धर्मसभा में जीवन को सार्थक बनाने वाली सीखों से दिगंबर जैन समाज के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…
पथरिया। आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में जारी है। यहां पर विराजित मुनिराजों की नित धर्मसभा में जीवन को सार्थक बनाने वाली सीखों से दिगंबर जैन समाज के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागरजी ने प्रवचन में रविवार को कहा कि- जीवन में सफलता का मूलमंत्र है लक्ष्य के प्रति निष्ठा।
जो व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होता है, जो हर दिन उस लक्ष्य को पाने के लिए परिश्रम करता है, वह चाहे कितनी भी बाधाओं का सामना करे, अंततः विजय उसी की होती है। निष्ठा का मतलब है- बिना डिगे, बिना थके, निरंतर आगे बढ़ते रहना। असफलता आ सकती है, रास्ते कठिन हो सकते हैं, लोग आपके प्रयासों पर सवाल उठा सकते हैं लेकिन, अगर आपका मन सच्चे इरादे और पूर्ण निष्ठा से अपने लक्ष्य से जुड़ा है तो कोई शक्ति आपको हार नहीं दिला सकती। यही कारण है कि कहा गया है-‘जो अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठावान होता है, उसकी कभी भी हार नहीं होती।’













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