मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि सही और श्रेष्ठ उच्च स्थर पर जीवन जीना है तो अपने विचारो को श्रेष्ठ और विशाल बनाओ क्योंकि कुछ भी अच्छा या बुरा प्राप्त करने के लिए हमारे विचार ही है, जो हमें अच्छा इंसान और बुरा इंसान बनाते है क्योंकि जीवन पूरा सही सोच, सही विचार पर टीका हुआ है। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर…
नांद्रे। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज,मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि सही और श्रेष्ठ उच्च स्थर पर जीवन जीना है तो अपने विचारो को श्रेष्ठ और विशाल बनाओ क्योंकि कुछ भी अच्छा या बुरा प्राप्त करने के लिए हमारे विचार ही है, जो हमें अच्छा इंसान और बुरा इंसान बनाते है क्योंकि जीवन पूरा सही सोच, सही विचार पर टीका हुआ है।
व्यक्ति जो सोचता है, वही करने का कार्य करता है। सदा उंचे ख्वाब सोचो, नीची सोच मत सोचो छोटा सोचोगे, तो कभी भी ऊंचा उठ नहीं पाओगे, जैसे किसी को बड़ा पैसे वाला बनना है या बडा साधु महात्मा बनाना है तो उनके मार्ग पर उनके सोच पर उनके विचार पर चलना पडे़गा। आप सोचे कि मेरी एक दुकान हो जाए तो भाई आपकी दुकान भी हो जाए तो बहुत बडी बात है। इसलिए सोच को बड़ा करो और उस सोच पर पुरुषार्थ प्रारंभ कर दो तो आप आवश्य श्रेष्ठ और उच्च व्यक्ती बन सकते हो।













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