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चातुर्मास आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण समय: मुरैना में वर्षायोग मंगल कलश स्थापना समारोह 20 जुलाई को  


आचार्य श्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज का वर्षायोग के लिए भव्य मंगल कलश स्थापना समारोह 20 जुलाई को होगा। दोपहर एक बजे से विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। मंगलाचरण, ध्वजारोहण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ होगा। नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। नगर में विराजमान दिगम्बर जैन युगल मुनिराजों का भव्य चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह 20 जुलाई को आयोजित होगा। जैन धर्म में चातुर्मास का तो महत्व है ही साथ ही चातुर्मास के आरंभ से पूर्व विधिवत मंगल कलशों की स्थापना का भी विशेष महत्व है। जैन श्रावक-श्राविकाएं जिस तरह चातुर्मास में संतों के सानिध्य के लिए विशेष तैयारियां करते हैं, उसी तरह चातुर्मास के शुभारंभ के पहले कलश स्थापना को लेकर भी समाज विशेष तौर पर तैयारियों में जुट जाते हैं। यह धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। मंगल कलश स्थापना के समय श्री जिनेंद्र प्रभु का आह्वान और मंत्रोचारण के साथ चातुर्मास स्थल पर सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक है।

इसे शुभता और शक्ति का प्रतीक भी माना गया है। कलश स्थापना का अर्थ है मंत्रोचारण के साथ श्री जिनेंद्र प्रभु का आह्वान करना और पवित्र ऊर्जा का प्रवेश कराना है। जिससे शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जैसा कि वर्णित है कि चातुर्मास आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण समय होता है और कलश स्थापना इस अवधि में की जाने वाली पूजा-पाठ और साधनाओं को और अधिक फलदायी बनाती है। चातुर्मास त्याग, तप, व्रत और संयम की साधना का समय होता है। चातुर्मास का समय साधु-संतों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वे इस दौरान अपनी साधना और उपासना में अधिक समय लगाते हुए स्व कल्याण के साथ साथ प्राणिमात्र के कल्याण हेतु सतत् प्रयास करते हैं।

वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक राजेंद्र जैन दयेरी वाले ने बताया कि बड़े जैन मंदिर में आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज से दीक्षित आचार्य श्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज का वर्षायोग के लिए भव्य मंगल कलश स्थापना समारोह बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) व संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (बम्होरी) के मार्गदर्शन एवं ब्रह्मचारी अजय भैयाजी (झापन तमूरा वाले) दमोह के निर्देशन में 20 जुलाई को दोपहर एक बजे से विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होने जा रहा है।

नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे

इस अवसर पर देशभर से सैकड़ों की संख्या में गुरुभक्तों के सम्मिलित होने की संभावना को देखते हुए आवास, भोजनादि की सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस अवसर पर भजन गायक एवं संगीतकार आदीश जैन एंड पार्टी गढ़ाकोटा द्वारा संगीत की स्वर लहरी से सभी को मंत्र मुग्ध किया जाएगा। मंगलाचरण, ध्वजारोहण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ होगा। नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। कार्यक्रम उपरांत सभी के लिए सामूहिक वात्सल्य भोज की व्यवस्था की गई है।

किसी भी शुभ कार्य को करने से पूर्व मंगल कलश की स्थापना का विधान प्रायः सभी धर्मों में देखने को मिलता है। चातुर्मास के दौरान कलश स्थापना एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। जो न केवल सकारात्मक ऊर्जा लाता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-साक्षात्कार के लिए भी मार्ग प्रशस्त करता है। जैन धर्म में कलश को एक शुभ वस्तु के रूप में देखा जाता है। जो सृजन और जीवन की संभावना का प्रतिनिधित्व करता है। कलश को सुरक्षात्मक भी माना जाता है और यह माना जाता है कि यह नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है।

इस अवसर पर मुनिराजों के पावन सानिध्य में प्रातःकालीन बेला में स्यादवाद युवा क्लब मुरैना द्वारा सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया जाएगा। तत्पश्चात बालिका मंडल द्वारा श्री भक्तामर विधान का आयोजन किया जाएगा। इस मांगलिक आयोजन में स्यादवाद युवा क्लब एवं बालिका मंडल के सभीजन अपने विशेष परिधान में उपस्थित रहेंगे।

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