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विश्व शांति महायज्ञ 11 जुलाई को : निकाली जाएगी भव्य रथयात्रा


श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुनि श्री विलोक सागर महाराज ने गुरुओं की महिमा का गुणगान किया। मुरैना सेमनोज जैन की पढ़िए, यह खबर…


मुरैना। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान मुनिराज विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज की प्रेरणा एवं सानिध्य में विधानाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले), संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (बम्होरी) के आचार्यत्व एवं ब्रह्मचारी अजय भैयाजी (झापन तमूरा वाले) के निर्देशन में 3 से 10 जुलाई तक विभिन्न आयोजनों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ। भजन गायक एवं संगीतकार हर्ष जैन एंड पार्टी भोपाल ने अपनी मधुर स्वर लहरी से सभी को आनंदित किया। इस अवसर पर मुनि श्री विलोकसागर जी महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र का अर्थ है सिद्धों का समूह।

तीन लोक के अग्रभाग पर अनन्तानन्त सिद्ध विराजमान रहते हैं। उन सबको सिद्धचक्र विधान के माध्यम से नमन किया गया है। अष्टान्हिका पर्व में प्रायः सभी जगह सिद्धचक्र विधानों के आयोजन किए जाते हैं। क्योंकि मैना सुंदरी ने अष्टान्हिका में इसकी विधिवत् आराधना करके अपने पति एवं सात सौ कुष्ठियों का कुष्ठ रोग दूर किया था। “सिद्ध” यह शब्द विशेष मंगलसूचक है। इस पद के नामोच्चारण से अनेक कार्यों की सिद्धि होती है।

 मुनिराजों का हुआ अष्टद्रव्य से पूजन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मुनि श्री विलोक सागर महाराज ने गुरुओं की महिमा का गुणगान करते हुए सभी को शुभाशीष प्रदान किया। इस पावन अवसर पर आचार्यश्री विद्यासागरजी, आचार्यश्री सुमति सागरजी, आचार्यश्री ज्ञानसागरजी, आचार्यश्री आर्जवसागरजी, आचार्यश्री समयसागरजी, मुनिश्री विलोकसागरजी, मुनिश्री विबोधसागरजी सहित अन्य मुनिराजों का अष्टदृव्य से पूजन किया गया। मंचासीन युगल मुनिराजों का पाद प्रक्षालन कर, उन्हें शास्त्रादि भेंट किए गए।

विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ

श्री सिद्धचक्र विधान के मुख्य संयोजक अनूप जैन भंडारी ने बताया कि श्री सिद्ध महामंडल विधान के अंतर्गत 3 से 10 जुलाई तक निरंतर सिद्धों की आराधना की गई। सिद्धचक्र विधान पूजन में अब तक हुए अनंतानंत सिद्ध एवं हो रहे तथा होंगे, ऐसे सिद्ध भगवान के गुणों की आराधना करते हुए 8, 16, 32, 64, 128, 512, 1024 इस तरह क्रमशः वृद्धिगत क्रम से अनन्तानन्त सिद्ध भगवान के गुणों की आराधना की गई। शुक्रवार को विधान के समापन पर विश्व शांति एवं कल्याण की पावन भावना के साथ महायज्ञ किया जाएगा। जिसमें विधान में सम्मिलित होने वाले सभी साधर्मी बंधु, माता बहनों के द्वारा आहुति दी जाएगी।वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व की अशांति और कलयुग में बढ़ती नैतिक और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए महायज्ञ का अयोजन होगा। जिसमें मंत्रों की आहुति दी जाएगी। यज्ञ प्रभु आशीर्वाद के माध्यम से विश्व शांति और मानवता की रक्षा के लिए समर्पित होते है। महायज्ञ में भाग लेने का अवसर एक अद्वितीय आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव कराता है, जो विश्व कल्याण के लिए अमूल्य योगदान देगा।

 जिनेंद्र प्रभु रथ में सवार होकर करेंगे नगर भ्रमण

11 जुलाई को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर आज प्रातः 8 बजे बड़े जैन मंदिर से विशाल एवं भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। श्री जिनेंद्र प्रभु को रथ में विराजमान कर बैंड बाजे, ढोल नगाड़ों के साथ नगर भ्रमण कराया जाएगा। बड़े जैन मंदिर से रथ यात्रा प्रारंभ होकर गोपीनाथ की पुलिया, पीपल वाली माता, रुई की मंडी, सदर बाजार, हनुमान चौराहा, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंचेगी। जैन मंदिर में श्री जिनेंद्र प्रभु को चांदी की पाण्डुक शिला पर विराजमान किया जाकर चांदी के मुकुट हारों एवं बाजूबंदों से सुसज्जित विशेष परिधान में इंद्रों द्वारा स्वर्ण कलशों से जलाभिषेक किया जाएगा। विशाल एवं भव्य रथयात्रा चल समारोह में सुसज्जित घोड़ा बग्गियों में सौधर्म इंद्र इंद्राणी, कुबेर इंद्र इंद्राणी, महासती मैनासुंदरी श्रीपाल, महायज्ञ नायक सहित अन्य पात्र विराजमान रहेंगे। रथ यात्रा में आगे आगे पूज्य युगल मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज चलेंगे। शोभायात्रा में विभिन्न स्थानों पर श्री जी एवं पूज्य मुनिराजों की आरती उतारकर भव्य अगवानी की जाएगी । सभी साधर्मी बंधु, माता बहनें, महिला मंडल, बालिका मंडल, स्वयं सेवक दल आदि आदि अपने विशेष परिधान में रहेंगे।

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