भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में 10 जुलाई को गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। संगीतमय गुरु पूजन, गुरु भक्ति, आरती और मुनिराजों के प्रवचन होंगे। मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागर महाराज जी का 2025 का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे (महाराष्ट्र )। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में 10 जुलाई को गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। संगीतमय गुरु पूजन, गुरु भक्ति, आरती और मुनिराजों के प्रवचन होंगे। मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागर महाराज जी का 2025 का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। इसके चलते यहां पर नित्य मुनिश्री की धर्मसभा में धर्म देशना भी हो रही है। इसका नगर के जैन समाज के श्रद्धालु पुण्यार्जन कर धर्मज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागरजी ने यहां प्रवचन में कहा कि आज संवेदना में पलता धर्म है।
आज हर कोई भौतिकता कि ओर भाग रहा है। भौतिकता शरीर को वर्तमान में सुख जैसी लगती है परंतु वह भौतिकता आगे जाकर हमारे लिए अभिशाप का रूप लेती है। दुनिया में आपस में लोगों का एक-दूसरे से जुड़ाव कम हो रहा है। साथ ही अपनत्व का अभाव हो रहा है। जहां अपनापन होता है वहां पर संबंध सुरक्षित रहते हैं और जहां नहीं होता वहां संबंधांे में दरार पड जाती हैं। जहां धर्म के भाव हैं, वहीं पर परस्पर में प्रीति होती है। धर्म में मानवता, ममता, समता, उपकारता, समर्पण आदि भाव का दर्शन होता है। जहां इर्ष्या, स्पर्धा है वहां पर धर्म की क्रिया हो सकती है परंतु यथार्थता में धर्म का अभाव है।













Add Comment