मुनि श्री सारस्वत सागर जीका 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को आदिनाथ जैन सांस्कृतिक भवन, कस्बे डिग्रज में भक्ति पूर्वक मनाया जाएगा ।रथ, हाथी, घोडे, बैंडबाजे के साथ 2 जुलाई को नांद्रे में मुनिराजों की भव्य अगवानी होगी। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे। पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी,मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्धसागर जी एवं क्षुल्लक श्री श्रुत सागर जी उपसंघ का विहार 2 जुलाई को पूरा हो रहा है। मुनि श्री सारस्वत सागर जी उपसंघ डिग्रज में विराजमान हैं। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक ने कहा कि मुनि श्री सारस्वत सागर जीका 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को आदिनाथ जैन सांस्कृतिक भवन, कस्बे डिग्रज में भक्ति पूर्वक मनाया जाएगा। मुनिश्री सारस्वत सागर जी का जन्म मध्यप्रदेश के टीकमगढ जिले के छोटे से ग्राम मजना में 1 जुलाई 1998 को हुआ। श्रावक विनयकुमार जैन व सुनीता जैन की संतान भरत भैया की साधु सेवा और स्वाध्याय की मेहनत कुछ ऐसा रंग लाई कि वैराग्य कि निर्झरणी बहने लगी। 6 अक्टूबर 2017 को इंदौर (मप्र) में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज से सीधे ही मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनिश्री सारस्वत सागर जी रखा गया। मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज का मंगल वर्षायोग (चातुर्मास ) वर्ष 2018 में औरंगाबाद (महाराष्ट्र ),2019 में भिंड (मध्य प्रदेश), 2020 में वैशाली बसकुंड (बिहार), 2021 में सम्मेद शिखरजी झारखंड, 2022 में रायपुर छत्तीसगढ, 2023 में बडोत (उत्तर प्रदेश), 2024 में सोलापुर (महाराष्ट्र)में हुआ। 2025 का चातुर्मास नांद्रे (महाराष्ट्र) में होगा।
महावीर दिगंबर जैन मंदिर,नांद्रे का यह प्राचीन मंदिर 100 साल पुराना है। और यहां पत्थर का मानस्तंभ है। नांद्रे में जैन समाज के 1300 घर है। नांद्रे गांव के अभी तक 3 भट्टारक स्वामीजी हुए हैं। श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा भट्टारक महाराज ने बनवाई है। नांद्रे के इतिहास में चातुर्मास के लिए पहली बार पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर महाराज जी का इंदौर से नांद्रे तक 900 किमी विहार हुआ है। मुनियों की चरणरज से पवित्र होगी नांद्रे की भूमि। रथ, हाथी, घोडे, बैंडबाजे के साथ 2 जुलाई को नांद्रे में मुनिराजों की भव्य अगवानी होगी।













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