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तीर्थ और मंदिरों की सुरक्षा के लिए एक होना होगा : एकजुटता का आह्वान किया


यदि धर्म का मूल मंत्र अहिंसा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई कुछ भी अन्याय करे और उसका विरोध नहीं कर सकते। यह बात मुंबई निवासी मृगेंद्र जैन ने कही। मुंबई से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुंबई। अहिंसा और शाकाहार यह मूल सिद्धांत किस प्रमुख धर्म का है। इसको जानने से पहले यह समझना होगा कि यदि धर्म का मूल मंत्र अहिंसा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई कुछ भी अन्याय करे और उसका विरोध नहीं कर सकते। यह बात मुंबई निवासी मृगेंद्र जैन ने कही। उन्होंने कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म है। जिस धर्म में यह शिक्षा दी जाती है, भाव भी आते हैं तो वो हिंसा की श्रेणी में आते हैं। वाणी भी यदि कटुता वैमनस्यता होती तो भी हिंसा कहलाएगी। ऐसा जैन धर्म है। अहिंसा को जिस गहराई और सुक्षा स्तर तक अपनाया है। जैन धर्म को मानने वाले किसी भी तरह की हिंसा नहीं करते, किसी के धार्मिक स्थल पर कब्जा नहीं करते। साधु संतों विहार के समय क्यों एक्सीडेंट करते है, क्यों मारपीट करते है । साधु संत के पास कुछ नहीं होता, वो किसी से कोई दुर्व्यवहार नहीं करते। अन्य लोग जैनों द्वारा बनाए गए तीर्थो, उनकी जमीनों पर क्यों कब्जा करते है । स्वयं अपने धार्मिक स्थलों का निर्माण क्यों नहीं करते। आज पुरानी से पुरानी सभ्यता मिलती है उसमें जैनों की मूर्ति शिलालेख मिलते है । यह इस बात का प्रमाण है कि जैन धर्म शाश्वत है।

जैन अहिंसा को प्रमुखता से मानता है तो…

जैनों को अल्पसंख्यक मानते है पर उनको उसका कितना लाभ मिलता या फिर जैन उसका उपयोग करते है यह भी विचारणीय है। जैन अहिंसा को प्रमुखता से मानता है तो अपनी सुरक्षा भी करना जनता है। जिस दिन सभी जैन एक हो गए उस दिन उनसे बड़ा कोई रक्षक नहीं होगा। अभी हमको पंथों में बाट रखा है और एक होने में बाधा डालते है कि यह एक नहीं होने चाहिए यदि इनमें एकता हो गई तो फिर यही राज करेंगे। देखो, जैन लोग देश की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या होते हुए भी अल्पसंख्यक बने है। सभी सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं लेते । सबसे अधिक रेवेन्यू दे रहे है । किस तरह से देश सुरक्षा और सेवा करते है यह सब दिखता है । लेकिन उनमें एकता है तो सभी उनके पीछे भागते हैं। अब समय आ गया है कि हम सब जैनों को एक हो जाना चाहिए। हमारे सभी तीर्थ किसी भी पंथ के हो पहले वो जैन तीर्थ है। उसकी रक्षा करना प्रत्येक जैन का धर्म होना चाहिए।

सरकार को 24 प्रतिशत तक रेवेन्यू देते हैं

जिस दिन यह भावना आ गई तब अपने तीर्थ और धार्मिक स्थल क्या देश की भी सुरक्षा करने में समर्थ होंगे। सरकार को 24 प्रतिशत तक रेवेन्यू देते हैं। सबसे ज्यादा शिक्षित होने के बाद भी शांति पूर्वक देश की प्रगति और नियमों का पालन करने में तत्पर आगे रहते है । जैनों के सिद्धांतों को अपनाते हैं। अपरिग्रह, यदि जैन धर्म की सिद्धांतों को थोड़ा सा भी अपना ले तो बहुत सी समस्याओं का समाधान स्वयं हो जाएगा। आज का मूल मंत्र बंटेंगे तो कटेंगे एक है तो सैफ हैं।

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