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साधु-साध्वी जीवंत तीर्थ हैं : इनकी सेवा-सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी


पिछले 8 माह के 100 विहार में लगभग 500 साधु-साध्वी मंडल को 800 किमी का विहार करवाते हुए सेवा दी। ग्रुप में 108 सदस्य हैं। गत वर्ष मुंबई में हुए विहार सम्मेलन में बदनावर को प्रदेश में प्रथम स्थान पर आने पर ट्रॉफी दी गई थी। बदनावर से पढ़िए, यह खबर…


बदनावर। तीर्थ दो प्रकार के होते हैं। पहले स्थावर अर्थात जो स्थित है। जैसे पालीताणा, शिखरजी मोहनखेड़ा आदि। दूसरा होता है जंगम अर्थात घूमते-फिरते, जीवंत जैसे साधु-साध्वी आदि। जिस प्रकार स्थावर तीर्थ की सेवा एवं सुरक्षा करना आवश्यक है। वैसे ही इन घूमते-फिरते तीर्थ अर्थात साधु-साध्वियों की सेवा एवं सुरक्षा करना अति आवश्यक है। यह बात नगर के इस वर्ष के 100 विहार पूर्ण होने के अवसर पर विहार परिवार की ओर से आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्रीजयानंद सूरीश्वरजी मसा के शिष्य मुनिश्री अक्षयविजयजी मसा ने कही। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में तो यह कार्य और आवश्यक हो जाता है क्योंकि, हम देख रहे हैं कि हर 8-10 दिन में इनका एक्सीडेंट हो रहा है। हम 5 या 10 करोड़ लगाकर मंदिर तो बना सकते हैं लेकिन, इससे कई गुना खर्च करने पर भी एक साधु नहीं बना सकते हैं। यह समाज एवं देश की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे में विहार सेवकों की भूमिका अनुमोदनीय एवं अभिनंदनीय है। ऐसे कई अवसर आए हैं, जहां विहार सेवकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर साधु-साध्वियों को बचाया है। यह संतों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।

विहार सेवा से आत्मा को सिद्ध गति मिल सकती है

मुनि श्री ने कहा कि भगवान महावीर के 27 भव पूर्व नयसार के भव में उन्होंने साधु की सेवा की थी। उन्हें आहार दान देकर जंगल में सही रास्ता दिखाया था। यह प्रथम विहार सेवा थी। इसके बदले में संत ने नयसार को भवसागर से निकलने का रास्ता दिखाया था। इस प्रकार वह नयसार 27 भव पूर्ण करने के बाद तीर्थंकर महावीर बने। अर्थात विहार सेवा के माध्यम से आत्मा को सिद्ध गति प्राप्त हो सकती है।

विहार सेवकों ने जुलूस निकाला
इससे पूर्व पेटलावद रोड बस स्टैंड से मुनि मंडल को विहार सेवकों एवं श्रीसंघ ने जुलूस के रूप में नगर भ्रमण करवाया। रास्ते में जगह-जगह गहुली कर बधाया। जिन दर्शन के बाद प्रवचन हुए। नगर विहार सेवक ग्रुप ने सेवा दे रहे सदस्यों का बहुमान किया। जिसमें लक्ष्य पटवा, इशू खाबिया, ज्ञानेश जैन,ख्याति तातेड, काव्य बोराणा, मोक्षी मोदी आदि थे। काछीबडौदा, रुणीजा, लाबरिया, राजोद, बिरमावल, बखतगढ़, आदि के विहार सेवक भी उपस्थित थे।

800 किमी का विहार करवाया
मध्य प्रदेश के विहार कैप्टन नितेश तांतेड़ ने विहार संबंधी जानकारी में बताया कि पिछले 8 माह के 100 विहार में लगभग 500 साधु-साध्वी मंडल को 800 किमी का विहार करवाते हुए सेवा दी। ग्रुप में 108 सदस्य हैं। गत वर्ष मुंबई में हुए विहार सम्मेलन में बदनावर को प्रदेश में प्रथम स्थान पर आने पर ट्रॉफी दी गई थी। यह ग्रुप 5 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहा है। इस अवसर पर नवकारसी का आयोजन हुआ।लाभार्थी सुनीलकुमार अनिल कुमार सराफ का विहार परिवार ने बहुमान किया।

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