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मुनिश्री सुदत्तसागरजी को कमंडल शास्त्र भेंट: ज्ञान की रक्षा और प्रसार करना हमारा कर्तव्य- मुनिश्री 


श्रुत पंचमी महापर्व के पावन अवसर पर स्थानीय दिगम्बर जैन समाज की ओर से उपाध्याय मुनि श्री सुदत्त सागरजी महाराज को कमंडल और शास्त्र भेंट कर सबने पुण्यवृद्धि की और धर्मलाभ प्राप्त किया। शनिवार को पद्म प्रभु जिनालय में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा के बाद मां जिनवाणी की पूजा अर्चना की गई। दाहोद से पढ़िए, यह खबर…


दाहोद। श्रुत पंचमी महापर्व के पावन अवसर पर स्थानीय दिगम्बर जैन समाज की ओर से उपाध्याय मुनि श्री सुदत्त सागरजी महाराज को कमंडल और शास्त्र भेंट कर सबने पुण्यवृद्धि की और धर्मलाभ प्राप्त किया। शनिवार को पद्म प्रभु जिनालय में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा के बाद मां जिनवाणी की पूजा अर्चना की गई। उपाध्याय श्री 108 सुद्त सागर जी महाराज को समाज के श्रेष्ठि गण एवं समाज के सदस्यों ने नवीन कमंडल और शास्त्र भेंट किया।

मुनिश्री पिछले 20-25 दिनों से नगर में विराजमान है और समाजजनों को धर्म की प्रभावना, प्रवचनों और स्वाध्याय के माध्यम से धर्म उपदेश से लाभ पहुंचा रहे हैं। शनिवार को मुनि श्री के मुख से समाजजनों ने आज के दिन का महत्व समझा। मुनिश्री ने कहा कि श्रुत पंचमी का संदेश है कि ज्ञान की रक्षा और प्रसार करना हमारा कर्तव्य है। यह दिन हमें आचार्य धरसेन, आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबलि की दूरदृष्टि और त्याग की याद दिलाता है, जिन्होंने तीर्थंकर महावीर की वाणी को लिपिबद्ध करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

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