मुनि श्री प्रशमसागर जी, मुनिश्री सुप्रभसागर जी मुनिश्री प्रणतसागर जी एवं क्षुल्लक श्री विप्रज्ञसागर जी ससंघ का मंगल प्रवेश बुधवार शाम को हुआ। सभी समाजजनों ने औंकारेश्वर रोड स्थित रेलवे गेट पहुंच कर मुनि संघ की अगवानी की। गुरुवार को प्रात मुनि संघ के सानिध्य में पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में सामूहिक श्रीजी का अभिषेक किया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। त्याग और वैराग्य के लिए जाने वाले नगर में साधुओं का आना जारी है। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रशमसागर जी, मुनिश्री सुप्रभसागर जी मुनिश्री प्रणतसागर जी एवं क्षुल्लक श्री विप्रज्ञसागर जी ससंघ का मंगल प्रवेश बुधवार शाम को हुआ। सभी समाजजनों ने औंकारेश्वर रोड स्थित रेलवे गेट पहुंच कर मुनि संघ की अगवानी की। गुरुवार को प्रात मुनि संघ के सानिध्य में पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में सामूहिक श्रीजी का अभिषेक किया गया। आचार्य श्री शांति सागर वर्धमान देशना संत भवन में धर्मसभा का शुभारंभ सर्वप्रथम महिमा जैन के मंगला चरण से हुई। मुनि श्री प्रशम सागरजी को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य हीरामणी भूच एवं मीना जटाले को प्राप्त हुआ। मुनि श्री शुप्रभ सागर जी महाराज ने अपने वाणी का रसपान करवाते हुए कहा कि संसार में अनंत जीव हैं और उन अनंत जीवो के भले के लिए तीरियंच गति में हो नरक गति में हो प्रत्येक जीव की तलाश कहीं न कहीं सुख प्राप्त करता है।
नरक में दुख भोगने वाला नार्की जीव भी भले ही दुःख भोग रहा है पर इसकी भावना भी समझे तो वो भी दुखों से बचना चाहता है। हर जीव इस संसार में दुखो से बचना चाहता है कहीं न कहीं सुख़ को प्राप्त करना चाहता है। मेरा व्यवहार आप कें व्यवहार पर निर्भर करता है। यह वाक्य हम सभी को की हमारे जीवन में उतारना जरूरी है। चाहे कर्म सिद्धांत हो, वस्तु व्यवस्था हो, चाहिए आज के मनुष्य के परिणति हो अगर हम सामाने वाले से अच्छा चाहते हैं तो हमें भी तो अच्छा बर्ताव करना पड़ेगा। इसलिए हमें ये वाक्य को आपने जीवन में बार बार दोहराना पड़ेगा कि मेरा व्यवहार आप के व्यवहार पर निर्भर करता है।
वस्तु अपने स्वभाव को नहीं छोड़ती
आज भी कई गांव कई शहर कई प्रांत ऐसे हैं। जहां निर्ग्रंथ साधु के चरण रज पाने के लिए तरस गए हैं। हमंे कितने सहजता से निर्ग्रंथ साधुओं का पिच्छी कमंडल धारी साधुओं का समागम मिल रहा है। हमें जो मिल रहा है, हमंे उसे समझ कर इसको प्राप्त कर के अपने आप को अपने जीवन को बदलने कां प्रयास करंे क्योंकि, आप का व्यवहार सामने वाले का व्यवहार अपने आप बदलेगा। मुनि श्री प्रशम सागर जी ने कहा कि वस्तु अपने स्वभाव को नहीं छोड़ती। यदि वस्तु अपने स्वभाव को छोड़ दे तो कभी अशुद्ध ना होती। वस्तु स्वरूप को जिसने समझ लिया वो हर हाल में आनंदित रहता है पर जिसने वस्तु स्वरूप को नहीं समझा वे स्वर्ग में भी दुःखी रहता है। सत्य को जब तक समझ नहीं आता जब तक सत्य परमात्मा निर्दाेष परमात्मा की शरण को ग्रहण करेगा। नगर में मुनि संघ की आहार चर्या हुई। जिसका सौभाग्य कैलाशचंद जटाले परिवार, अविनाश कुमार पारस कुमार पंचोलिया परिवार, सलीत कुमार प्रफुल्ल कुमार परिवार एवम राजेंद्र जैन महावीर परिवार को प्राप्त हुआ। शाम को मुनि संघ का विहार सुलगांव की ओर हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।
मंडलेश्वर जैन समाज में हुआ नेत्रदान
मंडलेश्वर/सनावद–
मंडलेश्वर जैन समाज के वरिष्ठ श्री श्री जीवनचंद जी जैन के निधन के पश्चात उनके पुत्र मनोज जैन एवं समीर जैन ने धामनोद के समाजसेवी राकेश जैन एवं सोनू गांधी से संपर्क कर नेत्रदान की इच्छा जाहिर कि
इन्होंने धामनोद के रोटरी क्लब के नेत्रदान प्रभारी प्रकाश राठौड़* संपर्क किया
धामनोद में डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने खरगोन के नेत्र चिकित्सा सहायक श्री उदय सिंह जी राठौड़ एवं वार्ड बाय दीनानाथ जी गुप्ता को सरकारी वाहन से भेज कर रात 12:30 बजे नेत्रदान संपन्न कराया ।
मंडलेश्वर के जैन परिवार को इस दुख की घड़ी में साहसिक निर्णय लेने पर धामनोद की सामाजिक संस्थाओं ने धन्यवाद प्रेषित किया।।
श्रीफल न्यूज परिवार अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करता है ।













Add Comment