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सुमतिधाम में पट्टाचार्य महोत्सव का तीसरा दिन सम्पन्न : जीवन में सब कुछ विधि से ही होता है – आचार्य विशुद्ध सागर महाराज


सुमतिधाम, गांधी नगर इंदौर में आयोजित छह दिवसीय पट्टाचार्य महोत्सव के तीसरे दिन आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के प्रवचनों के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें उन्होंने विधि के विधान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में जो कुछ होता है वह एक अदृश्य शक्ति के नियमानुसार ही होता है। देशभर से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति में 11 आचार्यों, 8 उपाध्यायों और 140 मुनिराजों का सम्मान किया गया तथा नवीन पिच्छी और कमंडल भेंट किए गए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। गांधी नगर स्थित सुमतिधाम में जारी 6 दिवसीय पट्टाचार्य महोत्सव के तीसरे दिन देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विविध धार्मिक गतिविधियां सम्पन्न हुईं। मंगलवार को हुए प्रवचनों में आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा, “इस सृष्टि को चलाने वाली एक अदृश्य शक्ति है, जिसे कोई पूर्ण रूप से नहीं समझ पाया। किसी ने उसे भगवान कहा, किसी ने विधाता, लेकिन वास्तविकता यही है कि सब कुछ विधि के विधान से होता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जीवन में सुख-दुख, मिलन-विछोह, सभी विधि का ही परिणाम हैं। “जब तक हम विधि को नहीं समझेंगे, तब तक घरों में कलह, भाइयों में झगड़ा और देश में अशांति बनी रहेगी।” प्रवचन के दौरान उन्होंने एक दृष्टांत के माध्यम से बताया कि जैसे फ्रिज में सब्जी लंबे समय तक टिकती है, वैसे ही मस्तिष्क को भी ‘विधि’ के शीतगृह में रखना चाहिए ताकि वह विकारों से बचा रहे।

मंच पर हुआ संतों का सम्मान

मंगलवार को नागपुर, हैदराबाद, सागर, भोपाल सहित देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने 12 आचार्यों को नवीन पिच्छी और कमंडल भेंट किए। पुरानी पिच्छियों को प्राप्त करने के लिए धर्मालंबियों में विशेष उत्साह देखा गया। 11 आचार्यों, 8 उपाध्यायों और 140 मुनिराजों का पाद-प्रक्षालन कर सम्मान किया गया।

भट्टारक सम्मेलन में कर्नाटक से पधारे भट्टारक स्वामी का स्वागत सपना-मनीष गोधा परिवार द्वारा किया गया। डॉ. उज्जवल पाटनी ने आचार्यश्री को “यूनिक पब्लिक स्पीकर” बताते हुए कहा कि उनका वाक्चातुर्य युगों तक प्रेरणा देता रहेगा। विश्व हिन्दू परिषद के डॉ. हुकुमचंद सांवला सहित अनेक विद्वानों ने भी विचार व्यक्त किए।

पट्टाचार्य पद प्रतिष्ठा आज, होगा भव्य ड्रोन शो

बुधवार, 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर पट्टाचार्य पद प्रतिष्ठा का मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज को गणाचार्य विराग सागर जी महाराज की आज्ञा से पट्टाचार्य की उपाधि प्रदान की जाएगी।

सुबह 5:15 बजे से स्तुति, देव-स्तवन, आचार्य वंदना और स्वाध्याय के बाद 6 बजे अभिषेक व शांतिधारा की विधियां सम्पन्न होंगी। 6:30 बजे परिसर में मंगल जुलूस निकाला जाएगा और 7 बजे से मुख्य संस्कार समारोह प्रारंभ होगा, जिसमें 36 विधिक संस्कार पूर्ण विधि-विधान से किए जाएंगे। सिंहासन की स्थापना के बाद विशुद्ध सागर महाराज को विधिवत पट्टाचार्य के रूप में प्रतिष्ठित किया जाएगा।

गोधा परिवार को इस ऐतिहासिक अवसर पर पट्टाचार्य पद के ‘माता-पिता’ बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। रात्रि में आरती, लेज़र शो, ड्रोन शो और सम्राट खारवेल नाटिका का मंचन किया जाएगा।

गणाचार्य विराग सागर जी की भविष्यवाणी हो रही पूर्ण

गणाचार्य विराग सागर जी महाराज ने अपनी समाधि से एक दिन पूर्व वीडियो रिकॉर्ड कर स्पष्ट किया था कि “अब संपूर्ण संघ का संचालन आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज करेंगे।” यह घोषणा आज पट्टाचार्य महोत्सव के रूप में साकार हो रही है। विराग सागर जी महाराज ने 500 से अधिक शिष्य-प्रशिष्यों को शिक्षा दी और 150 से अधिक समाधि कराई। 4 जुलाई 2024 को उन्होंने जालना (महाराष्ट्र) में समाधि ली थी।

पट्टाचार्य पद का महत्व

पट्टाचार्य वह होता है जिसे गुरू अपनी आज्ञा से संपूर्ण संघ के संचालन हेतु नियुक्त करते हैं। आचार्य तो अपने संघ का संचालन करते हैं, लेकिन पट्टाचार्य पूरे चातुर्विध संघ—आचार्य, उपाध्याय, मुनि, आर्यिका, ऐलक, क्षुल्लक और ब्रह्मचारी—के अनुशासन, दीक्षा, प्रायश्चित, चातुर्मास की स्वीकृति, शास्त्र अध्ययन, समाधि आदि का संचालन करते हैं।

बच्चों के लिए जैन संस्कार आधारित गेम्स

सुमतिधाम में बच्चों के लिए विशेष जैन गेम ज़ोन तैयार किया गया है, जिसमें जैन पज़ल, तीर्थंकर छुपाछुपी, कौन बनेगा धर्मशिरोमणि, जैन सांप-सीढ़ी जैसे खेलों के माध्यम से उन्हें जैन संस्कार सिखाए जा रहे हैं। वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से श्रवणबेलगोला, शिखरजी सहित तीर्थों के दर्शन भी कराए जा रहे हैं।

ई-कार्ट सेवा बनी सहायक

65 एकड़ क्षेत्र में फैले इस विशाल आयोजन में डॉर्मिटरी, वातानुकूलित कॉटेज, ज्ञानशाला, शास्त्र प्रदर्शनी, बाल संस्कार शिविर, प्ले जोन, समवसरण रचना, चाय-कॉफी शॉप आदि की भव्य व्यवस्थाएं की गई हैं। भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए परिसर को पूरी तरह वातानुकूलित किया गया है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए ई-कार्ट सेवा विशेष रूप से सहायक सिद्ध हो रही है।

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