समाचार

सुमतिधाम में पट्टाचार्य महोत्सव का दूसरा दिन श्रद्धा, साधना और समर्पण का प्रतीक बना : गुरु के प्रति श्रद्धा से ही होता है ज्ञान का उदय- आचार्य विशुद्ध सागर 


सुमतिनाथ दिगंबर जिनालय, गोधा एस्टेट, गांधी नगर में चल रहे छह दिवसीय पट्टाचार्य महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और साधना की अविरल धारा बही। 40 डिग्री तापमान की प्रचंड गर्मी भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। देश के 28 राज्यों और विदेशों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य विशुद्ध सागर महाराज सहित 388 संतों और आर्यिकाओं के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर, 28 अप्रैल। गांधी नगर स्थित गोधा एस्टेट के सुमतिधाम में चल रहे छह दिवसीय पट्टाचार्य महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आत्मीयता का अद्भुत संगम देखने को मिला। 40 डिग्री की तीव्र गर्मी के बावजूद देशभर के 28 राज्यों सहित विदेशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य विशुद्ध सागर महाराज और उनके विशाल संतवर्ग के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

इस अवसर पर देशना मंडप में आचार्यश्री ने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कहा, “मौसम अपना धर्म नहीं छोड़ता, ऋतु अपनी प्रकृति नहीं बदलती, तो फिर हम गुरु भक्ति कैसे छोड़ सकते हैं? जब तक गुरु के प्रति श्रद्धा नहीं होगी, तब तक ज्ञान का उदय असंभव है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “जैसे आम को देखकर मुंह में रस आ जाता है, वैसे ही गुरु व जिनेंद्र भगवान के दर्शन से सम्यक दर्शन प्राप्त होता है और मिथ्यात्व का नाश होता है।”

आहारचर्या भी अद्भुत

आचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज एवं गणिनी आर्यिका माताजी ने भी प्रवचन कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक दिशा दी। महोत्सव में भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों ने भी उपस्थित रहकर आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन 360 चौकों में संतों की आहारचर्या संपन्न हो रही है। सोमवार को आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज की आहारचर्या का सौभाग्य प्रभा देवी गोधा एवं मनीष–सपना गोधा परिवार को प्राप्त हुआ। साथ ही 12 आचार्य, 8 उपाध्याय, 140 मुनिराज, 9 गणिनी आर्यिका, 123 आर्यिका माताजी और 105 ऐलक-क्षुल्लक संतों की आहारचर्या संपन्न हुई।

गर्मी में तपकर ‘कुंदन’ बनते संत, तपस्वियों के दर्शन से उमड़ा जनसैलाब

आचार्यश्री के शिष्य मुनि श्रुसत सागर व विमल सागर महाराज ने 40 डिग्री तापमान में खुले मैदान में तप कर धर्मक्षेत्र को तपोभूमि बना दिया। तपते पथ पर नंगे पांव चलते हुए आहार के लिए निकले गुरुदेव को देखकर गुरुभक्तों की श्रद्धा और समर्पण ने एक नई ऊंचाई को छुआ। सुमतिधाम परिसर में संतों की आहारचर्या हेतु लगाए गए 360 चौके अत्यंत विधिपूर्वक संचालित किए जा रहे हैं, जहां द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की शुद्धि के साथ आहार निर्माण किया जाता है।

लेजर लाइट शो बना आकर्षण का केंद्र, संस्कृति व साधना का मिला संगम

रात्रि में आयोजित लेजर लाइट शो और महाआरती महोत्सव की प्रमुख विशेषता बनीं। भगवान आदिनाथ की गाथा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति, जैन धर्म के प्रतीकों का प्रोजेक्शन मैपिंग और गीत-संगीत के माध्यम से धार्मिक संदेशों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सुमतिधाम में गणाचार्य विराग सागर महाराज की प्रेरणा से निर्मित विरागोदय तीर्थ की प्रतिकृति और उनके साहित्य पर आधारित स्वाध्याय मंडप विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। गणाचार्यश्री के 500 से अधिक शिष्य-प्रशिष्यों द्वारा रचित ग्रंथों का भी वहां भव्य प्रदर्शन किया गया।

होगा शास्त्र प्रदर्शनी का उद्घाटन

महोत्सव समिति और गुरु भक्त परिवार ने जानकारी दी कि मंगलवार, 29 अप्रैल को दोपहर 2.30 बजे आचार्यश्री विशुद्ध सागर के सान्निध्य में शास्त्र प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। रात्रि 9 बजे स्वस्ति मेहुल की भजन संध्या तथा 11 बजे प्रोजेक्शन मैपिंग शो का आयोजन किया जाएगा।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
8
+1
0
+1
1
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page