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विस्तारवादी नीति से साधु धर्म का पालन नहीं होता-आचार्य विशुद्ध सागर: 80 त्यागी वृंद खरगोन की भूमि पर पधारे


नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं।खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन आए हैं। खरगोन से पढ़िए दीपक प्रधान की यह खबर…


 खरगोन। नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में चल रही भगवान महावीर मंदिर वेदी शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव में मंगलवार प्रातः गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ससंघ और गणिनी आर्यिका विशिष्ट श्री माताजी का आगमन हुआ। खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन की भूमि पर पधारे। गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज आर्यिका माताजी की अगवानी धूमधाम से नगरवासियों ने की। जो विकल्प मुक्त व संकल्प से युक्त है, उसे संसार का कोई भी तूफान हिला नहीं सकता।

आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अध्यात्म गंगा में समाहित कराते हुए आचार्य कुंदकुंद द्वारा लिखित समयसार ग्रंथ की प्राकृत गाथाओं के संदर्भ में कहा कि साधु समतावादी होता है, उसका सबके प्रति करुणा का भाव होता है। साम्राज्य परंपरा में साधु परंपरा नहीं है। राजा अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए कुछ भी करता है, लेकिन साधु अपनी साम्य समता भाव के कारण जाना जाता है। महापुरुष कभी भी व्यर्थ बकवास नहीं करता, सज्जन पुरुष सभी जीवो के कल्याण के लिए कार्य करता है, जो सिद्धांतों के विपरीत मान्यता रखता है वह दुखी रहता है।

जो व्यक्ति या साधु विकल्प से मुक्त और संकल्प से युक्त होता है। उसे संसार का कोई तूफान हिला नहीं सकता। हमेशा विवेकपूर्ण बोलना चाहिए। ध्यान रहे प्रज्ञाबल जिसके पास है बाहुबल उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता। भारत का प्रज्ञाबल मेघा प्रचंड है। भारत के इंजीनियर, डॉक्टर सभी को विश्व में पसंद किया जाता है, भारत का अध्यात्म वस्तु का स्वभाव है, भारत में साधु होते हैं इसलिए धर्म यहां सुरक्षित है।

भौतिक वस्तुओं में सुख नहीं है: गणधर विवर्धन सागर

गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने आचार्य विशुद्ध सागर जी के साथ हुए मिलन को सौभाग्यशाली बताया। उन्होंने कहा कि भौतिक वस्तुओं में सुख ढूंढने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता है। सद कर्तव्यों का पालन करो, व्यसनों से दूर रहो, गुरु के चरणों के समीप रहो। दोनों संघों का आत्मीय मिलन देखकर श्रद्धालुओं ने हर्ष व्यक्त किया।

सोलह स्वप्नों की प्रस्तुति ने मन मोहा

सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति महिला मंडल द्वारा दी गई। विभिन्न साज सज्जा के साथ भगवान महावीर के पांच नाम की नाटिका नृत्य की प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। प्रातः काल अभिषेक, शांति धारा, मंडल विधान,पूजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्मचंद शास्त्री ने संपन्न कराया।

1 लाख 25 हजार किमी पद विहार कर चुके हैं आचार्य विशुद्ध सागर जी 

मीडिया प्रभारी राजेंद्र जैन, महावीर आशीष जैन ने बताया कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने 35 वर्षों के साधु काल में सर्वाधिक पद विहार किया है। वे संपूर्ण भारतवर्ष में अभी तक 1 लाख 25 हजार किमी पद विहार कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि दिगंबर जैन साधु 24 घंटे में मात्र एक बार विधि पूर्वक आहार जल ग्रहण करते हैं। दिगंबर रहते हैं, पैदल पद विहार करते हैं ,किसी भी तरह के वाहनों का उपयोग नहीं करते हैं। भीषण गर्मी में भी पंखा कूलर आदि किसी भी प्रकार के भौतिक संसाधनों का उपयोग भी नहीं करते हैं। भीषण तापमान में भी पैदल पद विहार करना आम जनों को आश्चर्य में डालता है लेकिन, उनका तप, त्याग, तपस्या के बल पर यह सब संभव हो पता है। सायंकालीन आरती करने का सौभाग्यचंदा बडजात्या, मनीष रीना बड़जात्या ने और पाद प्रक्षालन चिंतामन जैन खंडवा, शास्त्र भेंट दयाचंद जैन खरगोन ने किया। आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन अरुण, तरुण, वरुण धनोते ने किया।

 बुधवार वेदी में विराजेंगे तीर्थंकर भगवान 

वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव संयोजक अनिल जैन, महामंत्री अरुण धनोते ,कोषाध्यक्ष जितेंद्र जैन ने बताया कि 80 वर्ष प्राचीन मंदिर को जीर्णाेद्धार कर नूतन मार्बल का मंदिर बनाया गया है। जिसमें मूल नायक भगवान महावीर की प्रतिमा के साथ नव प्रतिष्ठित शांतिनाथ भगवान, सुमति नाथ भगवान, चंद्रप्रभ भगवान, शीतलनाथ भगवान, पदमप्रभ भगवान की प्रतिमाएं नूतन जिन मंदिर में बुधवार प्रातः 9 बजे विराजमान की जाएगी।

रथ यात्रा से मंदिर पहुंचेंगे  

बुधवार प्रातः 7 बजे रथयात्रा राधा कुंज परिसर से महावीर मंदिर पोस्ट ऑफिस चौराहा पहुंचेगी। जहां नूतन वेदी में भगवान विराजमान होने के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी के मंगल प्रवचन होंगे। समाज अध्यक्ष विनोद जैन, विजय जैन, प्रदीप जैन, अरुण धनोते, जितेंद्र जैन, अनिल जैन, सुनील जैन ठेकेदार,अरुण जैन ठेकेदार, पंकज गोधा, राकेश जैन ने धर्म लाभ लेने की अपील की है।

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