श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार, अजमेर में आचार्यश्री वसुनंदीजी, श्री वृषभानंदजी व मुनिश्री सदानंदजी, क्षुल्लक पूर्णानंदजी एवं ब्रा.ब. नमन जैन के शुभाशीष से आगामी 20 से 25 अपै्रल को पंचकल्याणक महामहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यहॉ पर होने वाले ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु युगल नयनों की साक्षी में धातु से भगवान बनने की प्रक्रिया का साक्षात्कार रजयमयी विधिनायक जिनबिंब निर्माण उत्सव का आयोजन रविवार को प्रातः किया जायेगा। पढ़िए अजमेर से विनीत कुमार जैन की यह पूरी खबर…
अजमेर। श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार, अजमेर में आचार्य श्री वसुनंदीजी, श्री वृषभानंदजी व मुनिश्री सदानंदजी, क्षुल्लक पूर्णानंदजी एवं ब्रा.ब. नमन जैन के शुभाशीष से आगामी 20 से 25 अपै्रल को पंचकल्याणक महामहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
अजमेर की पावन वसंुधरा पर होने वाले ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु युगल नयनों की साक्षी में धातु से भगवान बनने की प्रक्रिया का साक्षात्कार रजयमयी विधिनायक जिनबिंब निर्माण उत्सव का आयोजन दिनांक 09 मार्च रविवार को प्रातः 9ः00 बजे से श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार पर किया जायेगा।
अष्टकुमारी एवं 56 बालिकाओं की प्रस्तुति
दोपहर 3.00 से 5.00 तक महिला मंडलों के द्वारा जिसमें 1008 महिलाएं मंगल बधाई का मंगलगान होगा। इस अवसर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में भाग लेने वाली अष्टकुमारी एवं 56 कुमारी बालिकाओं के द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। राजस्थान के अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित अजमेर नगर का अनुपम, अलौकिक दिगम्बर जैन तीर्थ जिनषासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार, अजमेर में है।
विश्व की अनुपम कृति
तीर्थक्षेत्र पर विश्व की अनुपम कृति व विश्व कीर्तिमान अलौकिक, असाधारण 54 फीट उतंग खडगासन 16वें तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी की कमलासन पर विशाल जिनबिम्ब, जिसका निर्माण 11 जुलाई 2018 से एकल 60 फीट पाषाण को क्षेत्र पर लाकर खड़ा करने के बाद जिन प्रतिमा का निर्माण कर नयानाभिराम रूप प्रदान किया गया।
संगमरमर की भव्य वेदिका
साथ ही 54 फीट उतंग जिनप्रतिमा जिनालय के उपर नक्काशी व सुन्दर कलाकृति से सुसज्जित संगमरमर का भव्य शिखर वेदी का निर्माण अति मनमोहक है। संगमरमर की भव्य वेदिका में वर्तमान में 24 तीर्थंकर श्री आदिनाथ से महावीर तक सवा ग्यारह फीट कमलासन पर विराजमान पाषाण की पद्मासन मनोज्ञ प्रतिमा, 24 रजतमयी (चॉंदी), 24 ताम्र्र प्रतिमा व दिस्य समवशरण, 1008 प्रतिमा से सुषोभित सहस्कूट जिनालय पाषाण से परमात्मा की दिव्य यात्रा हेतु प्रतिक्षारत है।
लाल मंदिर के नाम से विख्यात
क्षेत्र में वर्तमान में लाल मंदिर के नाम से विख्यात भगवान श्री शांतिनाथ, श्री चंदप्रभु, श्री पार्श्वनाथ स्वामी की स्फटिक मणी से निर्मित मनभावक, मनाहारी व अतिषयकारी प्रतिमा विराजमान है जिनका प्रतिदिन सैकड़ो श्रावक श्रेष्ठी जिनाभिषेक एवं शांतिधारा जन्म-जन्मान्तर के पापों से निवृत्ति पाते है। भव्य लाल मंदिर का शिलान्यास 31 अक्टूबर 2014 में हुआ व भव्य वेदी प्रतिष्ठा 13 नवम्बर 2014 में निर्माण कार्य आचार्यश्री वसुनंदीजी की प्रेरणा व सानिध्य में हुआ।
आचार्यश्री वसुनंदीजी के सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव
सम्पूर्ण भारतवर्ष में अपनी अलग पहचान रखने वाले जैसवाल जैन समाज के गौरव को जीवंतता प्रदान करने वाले श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र अजमेर का पंचकल्याणक महोत्सव पावन मंगलमय शुभ घड़ी दिनांक 20 अपै्रल 2025 से 25 अपै्रल 2025 जब आचार्यश्री वसुनन्दीजी महाराज चतुर्विघ संघ के पावन सानिध्य में पाषाण से परमात्मा की दिव्य यात्रा का सम्पूर्ण भारतवर्ष साक्षी बनेगा जो अजमेर नगर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने वाला एक अध्याय होगा।













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