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श्री विद्यासागरम् म्यूजियम का भव्य शिलान्यास हुआः सबको इस कार्य में तन-मन-धन से सहयोगी अवश्य होना चाहिए 


परम पूज्य आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज की प्रारंभिक साधना स्थली जहां आचार्यश्रीजी ने प्रथम मुनि दीक्षा आचार्यश्री समय सागरजी महाराज को प्रदान की। प्रथम पंचकल्याणक महोत्सव कराया। नैनागिरिजी के समीप हीरापुर में श्री विद्यासागरम् म्यूजियम का शिलान्यास विधि विधान के साथ किया गया। यहॉ उनके जीवनवृत पर आधारित 4000 फोटोग्राफ का अद्भुत संकलन होगा। पढ़िए डॉ. सुनील जैन संचय से हीरापुर (सागर) की यह पूरी खबर…


हीरापुर (सागर)। परम पूज्य आचार्यश्री 108 समय सागरजी महाराज के परम आशीर्वाद से पूज्य मुनिश्री प्रबोध सागरजी महाराज, पूज्य मुनिश्री शैल सागरजी महाराज, पूज्य मुनिश्री अचल सागरजी महाराज के सान्निध्य में अनेकों सिद्धक्षेत्रों के मध्य, आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज की प्रारंभिक साधना स्थली जहां आचार्यश्रीजी ने प्रथम मुनि दीक्षा आचार्यश्री समय सागरजी महाराज को प्रदान की। प्रथम पंचकल्याणक महोत्सव कराया ऐसे द्रोणगिरीजी के पास एवं मुनिश्री क्षमासागर मुनिश्री सुधा सागरजी महाराज आदि की क्षुल्लक दीक्षा स्थली नैनागिरिजी के समीप हीरापुर में श्री विद्यासागरम् म्यूजियम का शिलान्यास विधि विधान के साथ किया गया।

फोटोग्राफ का अद्भुत संकलन 

ब्र. वीरेंद्र हीरापुर ने बताया कि श्री विद्यासागरम् म्यूजियम में आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज के जीवनवृत पर आधारित 4000 फोटोग्राफ का अद्भुत संकलन होगा। यह संपूर्ण परिकल्पना पूज्य निर्यापक श्रमणश्री अभय सागरजी महाराज ससंघ, पूज्य मुनिश्री अजित सागरजी महाराज ससंघ, पूज्य मुनिश्री आगम सागरजी महाराज, पूज्य मुनिश्री शैल सागरजी महाराज एवं एलक श्री धैर्य सागरजी महाराज के आशीष तले पल्लवित हो रही है। कार्यक्रम मुख्य प्रतिष्ठाचार्य ब्र. संजीव भैया कटंगी, ब्र. जय निशांत भैयाजी टीकमगढ़, ब्र. राकेश भैयाजी सागर के द्वारा सम्पन्न कराया गया। इस मौके पर ब्र. सनत भैया, ब्र.शुभम भैया, ब्र. सुनील भैया, ब्र. देव भैया, ब्र. वीरेन्द्र भैया आदि व ब्र. अर्चना दीदी, ब्र. मंजू दीदी, ब्र. पप्पी दीदी आदि मंचासीन रहे।

तन-मन-धन से सहयोगी होवे 

इस दौरान ध्वजारोहण करने सौभाग्य अशोक ठेकेदार परिवार, बंडा ने प्राप्त किया। गुरु उपकार में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने भी तैयार रहें। मुनिश्री मुनिश्री ने प्रवचन में कहा कि मैं भी सौभाग्यशाली हूं जो आचार्यश्रीजी के इस पावन कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ, जो आचार्यश्रीजी की समाधि के बाद उनके उपकारों की यादगार के स्वरुप भारत में प्रथम कार्य हो रहा है। जो भी आचार्यश्रीजी को मानते हैं उन सबको इस कार्य में तन-मन-धन से सहयोगी अवश्य होना चाहिए। गुरु उपकार में अपना सर्वस्व न्यौछावर करना पड़े तो कर देना चाहिए।

हजारों श्रावक उपस्थित रहें

इस अवसर पर सुखानंद शाह, अजित जैन शिक्षक, अभय जैन (आर्थिक प्रकोष्ठ संयोजक, बीजेपी सागर), गुलाबचंद जैन आदि के साथ अनेकों शास्त्री-विद्वान, हीरापुर, शाहगढ, तिगोडा, बड़ामलहरा, भगवां, घुवारा, रामटोरिया, नरवां, अमरमऊ, मड़देवरा, बीला, बंडा दलपतपुर ,बकस्वाहा, बम्होरी, पथरिया, सापौन,सागर आदि अनेकों स्थानों के हजारों श्रावक उपस्थित रहें।

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