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जब कुछ नजर नहीं आता तब भगवान नजर आते हैं : भगवान पद्म प्रभु का मोक्ष कल्याणक मनाया


जैन धर्म के छठे तीर्थंकर पद्मप्रभु भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। श्री पार्श्वनाथ मंदिर परिसर भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लड्डू प्रभु चरणों में चढ़ाया गया। आचार्यश्री के प्रवचन हुए। पढ़िए झुमरीतिलैया से राजकुमार अजमेरा और नवीन जैन की खबर…


झुमरीतिलैया। श्री पार्श्वनाथ मंदिर परिसर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी और मुनिश्री प्रांजल सागर जी के सानिध्य में रविवार को जैन धर्म के छठे तीर्थंकर पद्मप्रभु भगवान का अभिषेक, शांतिधारा की गई। इसका सौभाग्य विनोद अजमेरा, शैलेश छाबड़ा ने प्राप्त कर मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लड्डू प्रभु चरणों में चढ़ाया। इस अवसर पर आचार्य श्री ने बताया कि हज़ारों वर्ष पहले सम्मेदशिखर जी के पर्वतराज के मोहन टोंक से भगवान पद्मप्रभु मोक्ष को प्राप्त किए थे। तब से पूरे विश्व में भगवान का निर्वाण महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।

ऐसे लोगों का दर्शन करना भी व्यर्थ

इसके बाद संघ सहित कार्यक्रम स्थल पर गुरुसंघ पधारे जहां दीप प्रज्वलित ललित-नीलम जैन सेठी और समाज श्रेष्ठिजनों ने किया। सुबोध गंगवाल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसके बाद आचार्यश्री ने अपने प्रवचन में वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक की जिंदगी हैं फुरसत न होगी काम से, कुछ समय ऐसा निकालो प्रेम करो भगवान से। आज का व्यक्ति इतना व्यस्त रहता है,धर्म करने का समय ही नही रहता है और कदाचित भूले-भटके मंदिर पहुंच भी जाए तो भी भगवान को नहीं देख पाता। वहां भी उसे मकान, दुकान बच्चे ही नजर भाते हैं। ऐसे लोगों का दर्शन करना भी व्यर्थ हो जाता है।

सकारात्मक सोच रखें, जीवन में धर्म बढ़ेगा

जो सच्चा श्रद्धालु होता है। वह अगर एक दिन भी भगवान के दर्शन न करे तो उसका मन खेद खिन्न हो जाता है। भोजन भी उसे अच्छा नही लगता है। ऐसे श्रद्धालु का दर्शन करना सार्थक कहलाता है। प्रायः देखा जाता है, व्यक्ति के जीवन में जब अशुभ कर्म का उदय आता है तब व्यक्ति अपनी आपत्ति-विपत्ति को दूर करने के लिए दर-दर की ठोकरे खाता है,किन्तु जब कही कोई उपाय नजर नहीं आता तब उसे भगवान, धर्म-गुरुओं की शरण मे ही आना पड़ता है। इसलिए कहते हैं। भगवान का नाम निरंतर सुख के दिनों में भी लेते रहना चाहिए। ताकि हमें कभी दुखों का सामना ही न करना पड़े। सकारात्मक सोच रखें। जिससे आपके जीवन में धर्म बढ़ेगा और सुख-शांति का अनुभव होगा।

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