जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ जी का जन्म और तप कल्याणक माघ माह की शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है। इसी दिन भगवान धर्मनाथ का जन्म हुआ और इसी दिन भगवान ने दीक्षा ग्रहण की। भगवान धर्मनाथ जैन धर्म की पताका फहराकर अपनी देशना से विश्व में कल्याण की भावना जगाने वाले तीर्थंकर हैं। जन्म एवं तप कल्याणकों पर विख्यात जिनालयों में भगवान धर्मनाथ की भक्ति, अभिषेक और शांतिधारा सहित मंगल आराधना होगी। श्रीफल जैन न्यूज ने भगवान श्री धर्मनाथ जी के जन्म एवं कल्याणक पर विशेष जानकारी संजो-सहेजी है। पढ़िए इंदौर से श्रीफल जैन न्यूज के उप संपादक प्रीतम लखवाल की यह स्पेशल रिपोर्ट…
इंदौर। धर्म के आलोक से विश्व को आलोकित करने वाले 15वें तीर्थंकर श्री धर्मनाथ जी का जन्म माघ शुक्ल त्रयोदशी के दिन रत्नपुर के राजा भानु की पट्ट महिषी सुव्रतादेवी की रत्नकुक्षी से हुआ। प्रभु के जन्म से इस धरती पर चारों ओर हर्ष, आनंद और शांति का संचार हुआ। पुत्र के युवावस्था में प्रवेश करने पर माता-पिता ने अनेक राजकन्याओं के साथ उनका विवाह संपन्न किया। भारी समारोह रचकर पिता ने धर्मनाथ को राजगद्दी पर प्रतिष्ठित किया। धर्मनाथ जी के धर्म शासन में अधर्म का अंधकार सर्वथा विलीन हो गया। कालांतर में राजपद का परित्याग कर माघ शुक्ल त्रयोदशी के दिन भगवान श्री धर्मनाथ जी ने दीक्षा ग्रहण की।
भगवान श्री धर्मनाथ के 43 गणधर
धर्म तीर्थ की स्थापना कर तीर्थंकर कहलाए। अरिष्ट आदि 43 प्रमुख शिष्य प्रभु के गणधर थे। प्रभु के धर्म परिवार में 64 हजार श्रमण, 62 हजार 400 श्रमणियां, 2 लाख 44 हजार श्रावक एवं 4 लाख 13 हजार श्राविकाएं थीं। पांचवे वासुदेव पुरुषसिंह एवं बलदेव सुदर्शन प्रभु के अनन्य उपासक थे। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन सम्मेद शिखर पर्वत से प्रभु ने निर्वाण प्राप्त किया। तीसरे चक्रवर्ती मघवा एवं चौथे चक्रवर्ती सनतकुमार भी प्रभु श्री धर्मनाथ के शासन काल में ही हुए। धर्मनाथ तीर्थंकर का चिन्ह वज्र है। वज्र इंद्र देव का शस्त्र है। इसलिए इंद्र को वज्रपाणि कहा जाता है। वज्र कठोरता का प्रतीक है। वज्र से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कष्टों में भी वज्र के समान दृढ़ रहना चाहिए। धर्म पालन में दृढ़ रहना चाहिए। अज्ञान, मोह और मिथ्यात्व पर वज्र प्रहार करने से ही सच्चे धर्म की प्राप्ति होती है। धर्मनाथ भगवान का चिन्ह धर्म मार्ग पर वज्र की तरह दृढ़ होकर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।













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