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धरियावद में तीन दिवसीय रजत जयंती महोत्सव का पारणोत्सव और रथावर्तन के साथ समापनः शक्ति हमारे अंदर होती है-मुनिश्री पुण्य सागरजी


आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागरजी महाराज के आशीर्वाद से दिगंबर जैन मंदिर की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का रजत जयंती महोत्सव, द्वय तपस्वी मुनिराजों का पारणोत्सव और महावीर वाटिका में नवनिर्मित पुण्य सागर सभागार का लोकार्पण समारोह गुरुवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन निष्क्रिडित व्रत साधना के 41 एवं 80 दिवसीय उपवास का महापारणा कराया गया। इस मौके पर महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर के शिखर पर नवीन ध्वजारोहण भी किया गया। पढ़िए धरियावद की यह पूरी खबर…


धरियावद। वात्सल्य वारिधि आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागरजी महाराज के आशीर्वाद से वात्सल्यमूर्ति 108 मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज ससंघ सान्निध्य एवं बालयोगी युवाचार्य 108 श्री श्रुतधर नंदीजी महाराज ससंघ की गरिमामयी उपस्थिति में श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का रजत जयंती महोत्सव, द्वय तपस्वी मुनिराजों का पारणोत्सव और महावीर वाटिका में नवनिर्मित पुण्य सागर सभागार का लोकार्पण समारोह गुरुवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन मुनि 108 श्री महोत्सव सागरजी महाराज एवं मुनि 108 श्री उदित सागरजी महाराज के क्रमशः त्रिलोकसागर व्रत और सिंह निष्क्रिडित व्रत साधना के 41 एवं 80 दिवसीय उपवास का महापारणा कराया गया। इस मौके पर महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर के शिखर पर नवीन ध्वजारोहण भी किया गया। दोपहर में महावीर वाटिका से श्रीजी की रथ यात्रा निकाली गई, जो नगर के विभिन्न मार्गों से भ्रमण करते हुए महावीर स्वामी मंदिर पहुंची। इस दौरान देश-प्रदेश से आए बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविका मौजूद रहे।

शक्ति हमारे अंदर होती है-मुनिश्री 

मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि शक्ति हमारे अंदर होती है, हमें स्वयं को उसे उद्घाटित करने की आवश्यकता है। बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती 108 श्री शांति सागरजी महाराज ने अपनी शक्ति को जाग्रत करके पूरे जीवन कठिन तपस्या और साधना की। उन्होंने सम्यक समाधिमरण कर हमें संयम साधना के मार्ग पर अग्रसर होने का उपाय औ मार्गदर्शन प्रदान किया था। हम उन्होंने हम सभी को जीवन में संयम धारण करने का संदेश दिया।

साधना को साकार किया 

मुनिश्री ने कहा कि शांति सागरजी महाराज की इस पट्ट परंपरा में ही उन्हें ‘पड़पोते‘ धरियावद नगर गौरव मुनिश्री उदित सागरजी महाराज और थांदला नगर गौरव मुनिश्री महोत्सव सागरजी महाराज ने इस काल में ऐसी साधना करके चतुर्थ काल की साधना को साकार कर दिया।

गुरुओं का आशीर्वाद तो तपस्या फलीभूत होती है

बालयोगी युवाचार्य 108 श्री श्रुतधर नंदीजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जिसके हाथ नीचे होते हैं, उसकी किस्मत पीछे होती है। वहीं, जिसके हाथ ऊपर, उसकी किस्मत सुपर होती है। उन्होंने ने कहा कि गर्भ में आए तो जन्म होना चाहिए, जन्म हो जाए तो दीक्षा होनी चाहिए, दीक्षा हो जाए तो ज्ञान होना चाहिए और अगर ज्ञान हो जाए तो निर्वाण होना चाहिए। वहीं, दोनों तपस्वी मुनिराजों ने कहा कि जिन पर गुरुओं का हाथ और आशीर्वाद होता है तो तपस्या अवश्य ही फलीभूत होती है। सभी लोगों को संयम धारण करके धर्म के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए।

योगदान हेतु उपाधियों से अलंकृत किया

दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि पुण्य सागर महाराज ने इस पारणा महोत्सव पर महोत्सव सागरजी महाराज को ‘तपस्वी सूर्य‘ और उदित सागरजी महाराज को ‘तपो मार्तंड‘ की उपाधि से अलंकृत किया। साथ ही रजत जयंती महोत्सव के अध्यक्ष भरत कुमार रत्नावत जो तपस्वी मुनिराज 1089 श्री उदित सागरजी महाराज के गृहस्थ अवस्था के ज्येष्ठ पुत्र हैं, उन्हें इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप से सफलतम समापन कराने में अपना अमूल्य योगदान करने के लिए ‘युवा रत्न‘ की उपाधि से अलंकृत किया।

समाज के श्रेष्ठीजनों का सम्मान

स्थानीय समाज के सेठ दिनेश कुमार जैकणावत, रजत जयंती महोत्सव के सौधर्म इंद्र अरविंद कुमार पचौरी, धनपति कुबेर शीतल कुमार अणादवत, भंवरलाल पचोरी, प्रतापगढ़ उप जिला प्रमुख सागरमल बोहरा, धनपाल वक्तावत, महावीर युवा मंच के अध्यक्ष रजनीश कुमार सुंदरोत, सूर्य प्रकाश बोहरा, कुंतीलाल वणावत सहित समाज के समस्त श्रेष्ठीजन का सम्मान किया गया।

भेंट का सौभाग्य व आहारचर्या का लाभ मिला

महावीर स्वामी जिनालय के शिखर पर नवीन ध्वजारोहण का लाभ नानालाल किकावत परिवार को मिला। वहीं, मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज को पिच्छिका भेंट का सौभाग्य इंदरमल विनोद कुमार पटवा परिवार, मुनि महोत्सव सागरजी महाराज को नवीन पिच्छिका भेंट का सौभाग्य महावीर प्रसाद सुंदरोत परिवार और मुनिश्री उदित सागरजी महाराज को नवीन पिच्छिका भेंट का सौभाग्य सन्मति कुमार धरणेंद्र जगीसोत परिवार (मुंबई) को मिला। इसी तरह द्वय तपस्वी मुनिराजों के पारणा महोत्सव में आहारचर्या का लाभ श्रीमती निर्मलादेवी, भरत कुमार, अनिल कुमार एवं समस्त रत्नावत परिवार को प्राप्त हुआ।

तीन दिवसीय कार्यक्रम सम्पन्न

तीन दिवसीय संपूर्ण कार्यक्रम बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी ‘बिगुल‘, बाल ब्रह्मचारी विकास भैया, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में पंडित भागचंद जैन, पंडित विशाल जैन के कुशल संचालन और ब्रह्मचारिणी मुन्नी बाई की गौरवमयी उपस्थिति में संपन्न हुए।

श्रद्धालुओं ने रथयात्रा का भक्तिभाव से स्वागत किया

उक्त समारोह में असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान सहित देश भर से मुनि पुण्य सागर भक्त मंडल के श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पारणोत्सव की अनुमोदना की। दोपहर के पश्चात रथयात्रा जुलूस नगर के महावीर वाटिका कल्याणपुरा रोड से शुरू होकर पुराना बस स्टैंड, सुभाष पार्क, हनुमान चौराहा, प्रतापगढ़ रोड होते हुए सुमतिलाल शिशुपाल अमित कुमार अदणावत परिवार के यहां पहुंचा। यहां धूमधाम से श्रीजी को अर्घ्य समर्पण, मंगल आरती, मुनिराजों का पाद प्रक्षालन और आरती प्रभावना वितरण किया गया। यहां से रथयात्रा नसियांजी, कबूतर खाना, केसरियाजी मंदिर, सदर बाजार होते हुए महावीर जिनालय पहुंची।

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