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भगवान महावीर जिनालय प्रतिष्ठापना रजत जयंती एवं पारणा महोत्सव का शुभारंभ: श्रीजी एवं मुनिश्री, आर्यिका संघ के साथ घटयात्रा जुलूस निकला


धरियावद में तीन दिवसीय भगवान महावीर जिनालय प्रतिष्ठापना रजत जयंती और पारणा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन और पाद प्रक्षालन आदि के कार्यक्रम हुए। जिनका श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ अर्जित किया। प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन के निर्देशन में कार्यक्रम के प्रथम दिन श्री दिगंबर जैन महावीर मंदिर एवं महावीर वाटिका परिसर में श्री मंदिर से श्रीजी एवं मुनिश्री, आर्यिका संघ के साथ घटयात्रा जुलूस निकला। इसमें समाजजनों ने बढ़-चढकर हिस्सा लिया। पढ़िए धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की यह खबर…


धरियावद। नगर के श्री दशा नरसिंहपुरा दिगंबर जैन समाज के आयोजकत्व एवं श्री सकल दिगंबर जैन समाज के निवेदन पर 3 दिवसीय भगवान महावीर जिनालय प्रतिष्ठापना रजत जयंती एवं पारणा महोत्सव के ऐतिहासिक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आचार्यश्री वर्धमानसागरजी महाराज एवं मुनिश्री पुण्यसागरजी महाराज के सानिध्य और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संहितासूरी प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन के निर्देशन में कार्यक्रम के प्रथम दिन श्री दिगंबर जैन महावीर मंदिर एवं महावीर वाटिका परिसर में श्री मंदिर से श्रीजी एवं मुनिश्री, आर्यिका संघ के साथ घटयात्रा जुलूस निकला। इसमें सभी इंद्र-इंद्राणी परिवार एवं समाज के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में निकले। जो नगर के सुभाष पार्क, पुराना बस स्टैंड, कल्याणपुरा रोड होते हुए महावीर वाटिका परिसर पहुंचे। यहां पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए।

विभिन्न कार्यक्रमों में इन्होंने लिया धर्म लाभ

कार्यक्रम में ध्वजारोहण राजेंद्र कुमार विनोद कुमार सिंघवी परिवार, पांडाल उदघाटन महेंद्र कुमार नितेश पटवा, धर्मसभा में चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन बाल ब्रह्राचारिणी वीणा दीदी, प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन, तीनों समाज के श्रेष्ठी करणमल सेठ, दिनेशकुमार जेकणावत, गुणवंत डूंगावत ने किया। आचार्य एवं मुनि संघ के पाद प्रक्षालन का लाभ मेवाड़ वागड़ दसा नरसिंहपुरा समाज के अध्यक्ष लक्ष्मीलाल मनोज कुमार अंकित कुमार बोहरा उदयपुर ने लाभ प्राप्त किया। संघ को जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य सूर्यप्रकाश अभिषेक अतिवीर बोहरा परिवार ने प्राप्त किया। सौधर्म इंद्र अरविंदकुमार पचौरी परिवार, पुष्कर बोहरा, जयेश जेतावत सहित 25 इंद्र इन्द्राणी परिवार ने इस अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य भागचंद जैन, विशाल जैन के मार्गदर्शन में कार्यक्रम में भाग लिया।

अतिथियों का स्वागत किया

बालक-बालिका मंडल, महिला मंडल, युवा मंडल, महावीर युवा मंच सहित रजत जयंती महोतसव के अध्यक्ष भरत कुमार रत्नावत की अध्यक्षता में कार्यक्रम हो रहे हैं। इस दौरान पूर्व विधायक नगराज मीणा एवं उप जिला प्रमुख सागरमल बोहरा अतिथि के रूप में सम्मिलित होने पर समाज ने उनका स्वागत-अभिनंदन किया।

मुनिश्री का हुआ वात्सल्य मिलन, लगाए जयकारे

दिगंबर जैन बालयोगी युवा आचार्य श्रुतधरनंदी महाराज ससंघ का मंगलवार को धर्मनगरी में वात्सल्य मूर्ति प्रज्ञा श्रमण मुनिश्री पुण्यसागर महाराज ससंघ का ऐतिहासिक वात्सल्य मिलन कांग्रेस कार्यालय के पास हुआ। इस दृश्य को देखकर उपस्थित श्रावक श्राविका समाज ने जन धर्म और दोना मुनिराज ससंघ की जयकारों से वातावरण को धर्ममय बना दिया। दिगंबर जैन समाज के अशोककुमार जेतावत ने बताया कि आचार्यश्री कुंथुसागर महाराज के प्रियाग्र शिष्य बालयोगी युवाचार्य मुनि श्रुतधरनंदी महाराज ससंघ का वर्ष 2024 का वर्षायोग गमेर बाग सेक्टर 14 उदयपुर में हुआ था। वर्षा योग पश्चात मुनिसंघ उदयपुर से लकड़वास, कानपुर, अडिंदा, भींडर, कूण, लसाड़िया, घाटा, जायाखेड़ा होते हुए धरियावद में मंगल प्रवेश हुआ।

आचार्यश्री की भव्य हुई अगवानी

आचार्य संघ में आचार्य श्रुतधरनंदी महाराज, मुनि उत्कर्षकीर्ति महाराज, क्षुल्लक सुप्रभातसागर महाराज ससंघ 3 पीच्छी शामिल है। आचार्य संघ का विगत दिनो संघस्थ क्षुल्ल्क सुप्रभातसागर महाराज के गृह नगर कूण में भव्य मंगल प्रवेश हुआ था जहॉ पर श्री समाज कूण एवं उनके गृहस्थ अवस्था के अनुज भ्राता व भ्राता वधू अशोक कुमार जेतावत व निर्मला जैन ने भव्य अगवानी की थी।

साथ साधु का हो तो सार दिखाई देता है

धरियावद में आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्रुतधरनंदी महाराज ने कहा कि साथ साधु का हो तो सार दिखाई देता है। संत जब आपस में मिलते हैं तो संस्कार और ज्ञान की बात होती है। मुनिश्री पुण्यसागर महाराज ने कहा कि राम हैं तो मैं श्रुतधरनंदी भक्त हनुमान के समान हूं। आचार्य ने कहा कि हाफ पेंट वाला, हाफ माइंड, फूल पेंट नो माइंड और नो पेंट फूल माइंड होता है। यह बात उन्होंने दिगंबर जैन मुनि मुद्रा के संदर्भ में कही थी।

जिनालय आन, बान, शान और संस्कृति के सूचक

मुनि पुण्यसागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिनालय के बिना जिनेंद्र भगवान का भक्त नहीं रह सकता है। वह देश के किसी भी कोने में चला जाए तो जिनेंद्र भगवान के मंदिर की खोज कर लेता है। जिनालय के माध्यम से भक्ति करने का अवसर प्राप्त होता है। जिनालय हमारी आन, बान, शान और संस्कृति के सूचक होते हैं। संत का जब संत से मिलन होता है तो 64 खिल जाते हैं, 32 तुम्हारे और 32 हमारे। मुनि श्रुतधरनंदी अत्यंत सौम्य, सरल, शांत और परिणामी संत हैं। मात्र 8 वर्ष की मुनि दीक्षा काल में आपने वात्सल्य मिलन का परिचय दिया है।

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