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सक्रिय दुर्जनों और निष्क्रिय सज्जनों से बिगड़ता है समाज: मुनिश्री विनम्र सागर जी के प्रवचनों का लाभ ले रहे जैन धर्मावलंबी


मुनिश्री विनम्र सागर जी महाराज कालानी नगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर में धर्म सभा को नित संबोधित कर रहे हैं। यहां पर प्रवचनों के अलावा पूजन, शांतिधारा आदि कार्यक्रम हुए। समाजजनों ने महाराजश्री को शास्त्र भेंट किए। पढ़िए इंदौर से यह खबर…


इंदौर। आप घर में पिता से अच्छे से सम्मान से बात करते हैं लेकिन, मां को हल्के में लेते हैं। हर दुख के समय में आपको पिता ही याद आते हैं। कहते हैं अरे बाप रे ऐसा कैसे हो गया? जिस प्रकार आप घर की मां को तवज्जो नहीं देते, ठीक ऐसे ही मंदिर जी में विराजित मां जिनवाणी को कहां इज्जत देते हो? क्या आपके ड्राइंग रूम में जिनवाणी रखी है? पुस्तक रहती है तो कमाल करती है ये जीवन में बदलाव लाती है। हमें मां जिनवाणी की भाषा नहीं आती, क्योंकि वो सब प्राकृत में है। नई पीढ़ी को हिंदी भी नहीं आती। आज हम ना हिंदी के रहें। ना अंग्रेजी के। आपके बच्चे मंदिर जाने लायक नहीं बचे। आपने उन्हें णमोकार मंत्र तो सिखाया किंतु पुण्य-पाप और प्रकृतियां नहीं सिखाई। आप उन्हें बड़ा आदमी बनना चाहते हैं। बढ़िया आदमी नहीं। यह उद्गार मुनिश्री विनम्र सागर जी महाराज ने कालानी नगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। मुनिवर कहते हैं कि समाज दो तरह के लोगों से बिगड़ता है। एक सक्रिय दुर्जनों से और दूसरा निष्क्रिय सज्जनों से।

दान से संपत्ति आती है

मुनिश्री ने कहा कि संपत्ति दान देने से आती है, केवल मेहनत करने से नहीं और हर 100 वर्ष में संपत्ति अपना मालिक बदलती है। आप लक्ष्मी दास मत बनिए। लक्ष्मीपति बनिए। कमाई का पहला हिस्सा मंदिर जी के दान के लिए निकालिए। मुनिवर ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के समय में जैन शासन बहुत उन्नत हुआ। हम परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। गुरुदेव भले ही चले गए लेकिन, उनके विचार नहीं जा सकते। नवाचार्य श्री समय सागर जी महाराज, आचार्य विद्यासागर जी महाराज की प्रतिकृति हैं। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि गुणवत्ता वाली मां जिनवाणी आपके ड्राइंग रूम का श्रृंगार बने।

यह हुए कार्यक्रम

दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि मंदिर में सुबह 7.30 बजे से मुनि श्री के मुखारविंद से शांति धारा हुई। सुबह 8.30 से आचार्य श्री जी का पूजन हुआ। सुबह 9 बजे से मुनि संघ के प्रवचन, कालानी नगर मंदिर प्रांगण पर हुए।

मुनिश्री को शास्त्र भेंट किया

मुनि श्री जी को शास्त्र जी भेंट करने का सौभाग्य वीरेंद्रकुमार टढा, सतीश जैन एवं बड़े बाबा नव युवक मंडल को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी, ऐलक श्री हीरक सागर जी और आर्यिका कीर्ति मति माताजी मंच पर विराजित थीं।

यह भी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में समाज के राकेश, अखिलेश, दिनेश सिंघई, सतीश डबढेरा, प्रदीप बल्ला, विमल बढ़जात्या, सुरेंद्र जी टडा वाले, निर्मल जैन, बैंक वाले, प्रमोद जैन आदि उपस्थित रहे।

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