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जो तुम्हारी जिंदगी में शुभ है, उसका स्वागत करो-मुनिश्री सुधासागर जी : मुनिश्री ने धर्मसभा में समाज को बताया मुहूर्त के महत्व


मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने शुक्रवार को धर्मसभा को संबोधित किया। अपने प्रवचन में जैन श्रद्धालुओं को ब्रह्ममुहूर्त सहित विभिन्न मुहूर्त के बारे में बताया। पढ़िए सागर से यह खबर…


सागर। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने शुक्रवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए अपने प्रवचन में जैन श्रद्धालुओं को ब्रह्ममुहूर्त सहित विभिन्न मुहूर्त के बारे में विस्तृत रूप से समझाया। उन्होंने कहा कि जहां 24 घंटे सूर्य का उदय रहता है। वहां कोई भी शुभ मुहूर्त नही होता, क्योंकि वहां रात नही है। रात की अशुभता नही है तो वहां सुबह की शुभता ब्रह्ममुहूर्त भी नहीं है।
ब्रह्ममुहूर्त ब्रह्म निर्माण का, कुछ करने का प्रतीक होता है। शुभ आने के पहले का जो मुहूर्त है, प्रातःकाल आने का जो मुहूर्त है, जिंदगी शुरू होने का जो मुहूर्त है, वो ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है।

कल का निर्माण आज होगा
जो भी तुम कार्य करने जा रहे हो उसके एक मुहूर्त पहले आपका शुभ मुहूर्त है, उसको संभाल लो बस। दुकान खोल रहे हो आज, बस एक दिन पहले को संभाल लो, कल दुकान खोलना है तो आज का दिन तुम्हारे लिए ब्रह्ममुहूर्त है। कल का निर्माण आज होगा। आज इतने पवित्र हो जाओ, इतनी भक्ति कर डालो कि कल जो भी काम करो कि हर चीज में सफलता तुम्हारे द्वार खड़ी रहे।

सूर्य उगने के पहले आर्यपुत्र उठता है
ब्रह्ममुहूर्त में सुख नहीं मिलता लेकिन, ब्रह्ममुहूर्त संभल गया तो कभी दु:ख नहीं मिलता। सूर्य का इंतजार मत करो, उगते हुए सूर्य का स्वागत करो, जो सूर्य तुम्हारी जिंदगी को प्रकाश से भर देगा। सूर्य उगने के बाद राक्षस उठता है और सूर्य उगने के पहले आर्यपुत्र उठता है, वो है भारतीय संस्कृति।

उगता हुआ देख लेंगे तो हमारा विकास है
जितने रात्रि में निशाचर होते हैं, शेर, बिल्ली, मार्जर आदि ये सब रात में जागते है और सुबह-सुबह सो जाते हैं। सूर्य हमें सोते हुए देख लेगा तो हमारा विनाश है और हम सूर्य को उगता हुआ देख लेंगे तो हमारा विकास है। हनुमान जी जब लंका जा रहे थे तब राम जी से उन्होंने लंका का गुण पूछा तब राम जी ने कहा- जहां के लोग सूर्योदय के बाद भी सोते हुई पाए जाएं, समझ लेना वही राक्षसों की नगरी है।

जिंदगी में जो शुभ हो उसका स्वागत करें
भरतेश वैभव में लिखा है कि भरत चक्रवर्ती को कभी सूर्य सोता हुआ नहीं देख पाया क्योंकि, वह सूर्यास्त के बाद सोता था। सूर्योदय के पहले उठ जाता था। जो चीज तुम्हारी जिंदगी में शुभ है उसका स्वागत करो। सूर्य के उदय होने से शुभ नहीं होगा, तुम उसका स्वागत करो तो शुभ होगा।

पहले तैयारी करो शगुन होगा
कल आपका जन्मदिन है, तो आज का दिन पवित्र कर दो, आज का दिन खुशियों से भर दो, आज आज मैं कुछ भी गलत नहीं करूंगा क्योंकि कल मेरा जन्मदिन है। जन्मदिन मानना है तो एक दिन पहले से तैयारी करो तो कल शगुन ही शगुन होगा। मौत सुधार ली तो जन्म सुधर जाएगा। जन्म सुधारने से मौत सुधरेगी ये कोई नियम नहीं है। यदि तुम चाहते कि तुम्हारा अगला भव अच्छा चाहते हो तो इस भव को सुधार लो, इस भव को ब्रह्म भव बना दो।

बिफोर टाइम भाव सुधारो
यदि तुम्हें अच्छा वर्ष चाहिए तो एक वर्ष पहले ब्रह्म वर्ष बना लो, इस वर्ष में कुछ गलत नहीं करूंगा क्योंकि, अगला वर्ष मुझे अच्छा चाहिए। यदि मेरा कल का दिन अच्छा होना चाहिए तो आज के दिन को ब्रह्ममुहूर्त बना लो। यदि तुम चाहते हो कि खेत में अच्छी फसल हो तो बोनी करके खेती की शुरुआत करो। खाने के पहले मुझे अच्छा खाना पचे इसलिए मैं खिलाकर के खाऊंगा। मकान में कल से रहूंगा।

धर्म करूंगा भक्तामर पढ़ूंगा
आज से ही उसको ब्रह्म बना दो, आज मैं इसमें धर्म करूंगा भक्तामर पढ़ूंगा, सबको बुलाऊँगा, भोजन करूँगा बाद में, पहले कराऊंगा जिसे नांगल कहते हैं। कल गाड़ी मेरे काम में आएगी, आज उस गाड़ी से कुछ अच्छा करो, आज किसी अच्छे कार्य तीर्थयात्रा, किसी अपाहिज को ले जाएगी, इस गाड़ी को ब्रह्म स्वरूप बना दो, जब भी तुम्हारा एक्सीडेंट होगा ये गाड़ी तुम्हारा बाल बांका भी नहीं होने देगी।

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