श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट एवं देवेंद्र नगर जैन समाज के अध्यक्ष पद पर एडवोकेट प्रदीप जैन को पुनः निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। समाज ने पिछले दो वर्षों के श्रेष्ठतम कार्यकाल और कमेटी की सराहनीय क्रियाशीलता को ध्यान में रखते हुए इन्हें अध्यक्ष पद की कमान फिर से सौंपी है। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
देवेंद्र नगर। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट एवं देवेंद्र नगर जैन समाज के अध्यक्ष पद पर एडवोकेट प्रदीप जैन को पुनः निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। समाज ने पिछले दो वर्षों के श्रेष्ठतम कार्यकाल और कमेटी की सराहनीय क्रियाशीलता को ध्यान में रखते हुए इन्हें अध्यक्ष पद की कमान फिर से सौंपी है।लगभग 35 वर्षों से प्रति दो वर्षों में कमेटी का निर्वाचन होने की परंपरा को ध्यान में रखते हुए, एडवोकेट प्रदीप जैन अपनी पूरी कमेटी के साथ समय-समय पर समाज की आवश्यक मीटिंग का आयोजन करते रहे हैं। इस दौरान मंदिर एवं समाज सेवा में उनकी निरंतर भागीदारी ने समाज में प्रसन्नता का माहौल बनाया है।
इन दो वर्षों में कमेटी की कार्यकुशलता के तहत मानस्तंभ की पुनर्प्रतिष्ठा, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा, गजरथ महोत्सव, निहार वाटिका निर्माण, साधुओं का वर्षायोग आदि कई कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं। इस वर्ष, दस लक्षण महापर्व के दौरान समस्त कमेटी ने अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के बाद निश्वार्थ भाव से अपने पद से इस्तीफा देकर कमेटी को भंग करने का निर्णय लिया और मतदान प्रणाली का समर्थन करने हेतु समाज से आग्रह किया। समाज ने मतदान प्रणाली का उत्साहपूर्वक समर्थन किया। इस हेतु डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. प्रमोद जैन, प्राचार्य इंद्र कुमार जैन (जैन सर), और आडिटर रवींद्र जैन (बंटी भैया) को निर्वाचन प्रमुख के रूप में प्रस्तावित किया गया।
कुछ सदस्यों ने अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष आदि पदों के लिए दावेदारी पेश की, लेकिन पुरानी कमेटी के प्रति समाज का समर्थन देखते हुए सभी ने एकजुट होकर समर्थन किया। अतः पुनः अध्यक्ष पद पर एडवोकेट प्रदीप जैन, उपाध्यक्ष पद पर इंद्र चंद्र जैन (बट्टू सेठ) एवं कल्पना जैन, महामंत्री पद पर रवि जैन (दादा), कोषाध्यक्ष पद पर संजय जैन (संजू मामा) / मनीष जैन (आदिनाथ एकेडमी), सहमंत्री के रूप में शांत कुमार जैन / राहुल जैन खभरा, राजुल (संजीव जैन), औरसाधना (संजय जैन) को सर्वसम्मति से चयनित किया गया।
महामंत्री रवि जैन ने बताया कि मंदिर व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में समाज का सहयोग हमारे लिए संबल प्रदान करता रहा है। कमेटी ने समाज के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास किया है और हमें पुनः प्रभु की सेवा एवं समाज कल्याण हेतु चयनित किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे किसी भी सदस्य में अहंकार का भाव नहीं है; हमारा सदैव जनहित की भावना पर जोर है।













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