जैन संत आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज ने मुरैना ही नहीं, बल्कि देश को गौरवान्वित किया है। भले ही पूज्यश्री आज हमारे बीच शारीरिक अवस्था में नहीं हैं, किंतु उनके दिए हुए संस्कार, उनके संदेश, और उनके उपदेश हमारे हृदय में अंकित हो गए हैं जो सदैव ज्ञानसागर को जीवंत बनाए रखेंगे। मैं व्यक्तिगत रूप से भी अपने आपको अर्ध जैन मानता हूं। मुझे अनेकों अवसरों पर सैकड़ों बार आचार्य ज्ञानसागर से रूबरू होकर आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिलता रहा है। उनके द्वारा ज्ञानतीर्थ के रूप में स्थापित की गई अनुपम कृति आज एक बड़े तीर्थ का रूप ले चुकी है। उक्त उद्गार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर ने ज्ञानतीर्थ पर आयोजित वार्षिक मेला एवं महामस्तकाभिषेक के अवसर पर जैन समाज को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। जैन संत आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज ने मुरैना ही नहीं, बल्कि देश को गौरवान्वित किया है। भले ही पूज्यश्री आज हमारे बीच शारीरिक अवस्था में नहीं हैं, किंतु उनके दिए हुए संस्कार, उनके संदेश, और उनके उपदेश हमारे हृदय में अंकित हो गए हैं जो सदैव ज्ञानसागर को जीवंत बनाए रखेंगे। मैं व्यक्तिगत रूप से भी अपने आपको अर्ध जैन मानता हूं। मुझे अनेकों अवसरों पर सैकड़ों बार आचार्य ज्ञानसागर से रूबरू होकर आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिलता रहा है। उनके द्वारा ज्ञानतीर्थ के रूप में स्थापित की गई अनुपम कृति आज एक बड़े तीर्थ का रूप ले चुकी है। उक्त उद्गार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर ने ज्ञानतीर्थ पर आयोजित वार्षिक मेला एवं महामस्तकाभिषेक के अवसर पर जैन समाज को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
इस अवसर पर मंचासीन युगल मुनिराज श्री शिवानंद जी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानंद जी महाराज ने श्री नरेंद्रसिंह तोमर को आशीर्वाद देते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी के 2550वें कल्याणक के उपलक्ष्य में मुरैना नगर में एक भगवान महावीर कीर्ति स्तंभ का निर्माण होना चाहिए। साथ ही साधु संतों का समाधिमरण होने पर दाहसंस्कार हेतु एक अलग स्थान होना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक पंकज जैन (बंदना साड़ी) एवं संयोजक राहुल जैन द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार युगल मुनिराजों के पाद प्रक्षालन एवं भगवान आदिनाथ की शांतिधारा करने का सौभाग्य पटेल नगर दिल्ली निवासी चौधरी मोहित जैन “चीकू” और शुभम जैन को प्राप्त हुआ। मूलनायक भगवान आदिनाथ जी के प्रथम कलशाभिषेक बकीलचंद, नीरज, पंकज, राजीव विवेक विहार दिल्ली ने किए। इस पावन अवसर पर रोहित जैन आर्टिटेक्ट ग्वालियर को जिनेंद्र प्रभु के सिर पर छत्र लगाने का और पंचाराम राजीव जैन शकरपुर दिल्ली व प्रेमचंद पंकज जैन मुरैना को चवर प्रदान करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
महामस्तकाभिषेक से पूर्व अनिल शाह ग्वालियर द्वारा ध्वजारोहण, संतोष गौरव रानू चिराग जैन विराट नगर दिल्ली द्वारा चित्र अनावरण, और अरुणकुमार संतोष दिग्विजय धनंजय विवेक विहार ने दीप प्रज्वलित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के परम भक्त मनोज जैन बाकलीवाल आगरा ने किया। कार्यक्रम के मध्य सभी धार्मिक क्रियाएं बाल ब्रह्मचारी नितिन जैन भैयाजी खुरई एवं जबलपुर से पधारे भैयाजी ने संपन्न कराई। ब्रह्मचारिणी बहिन अनीता दीदी, रेखा दीदी, सरिता दीदी, और ललिता दीदी के निर्देशन में सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
कार्यक्रम में मुरैना सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, मुरैना नगर निगम की महापौर सरला सोलंकी, मुरैना भाजपा जिलाध्यक्ष योगेशपाल गुप्ता, अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन, योगेश जैन खतोली वाले दिल्ली सहित हजारों की संख्या में गुरुभक्त मौजूद थे।
इस अवसर पर मुरैना के युवा साथियों द्वारा स्वल्पाहार एवं आयोजन समिति द्वारा सभी के लिए वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया था।













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