श्रमण संस्कृति के शताब्दी देशना चार्य, पट्टाचार्य चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी नादनी, महाराष्ट्र में चातुर्मास कर रहे हैं। गुरु भक्त अपनी भक्ति की प्यास बुझाने के लिए वहां पहुंचे हैं। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
टीकमगढ़। श्रमण संस्कृति के शताब्दी देशना चार्य, पट्टाचार्य चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी नादनी, महाराष्ट्र में चातुर्मास कर रहे हैं। गुरु भक्त अपनी भक्ति की प्यास बुझाने के लिए वहां पहुंचे हैं।
टीकमगढ़ जैन समाज से 101 समाज बंधुओं का एक दल आचार्य श्री विशुद्ध सागर के श्री चरणों में अपनी मंगल भावना लेकर आशीर्वाद लेने और नमोस्तु शासन जयवंत करने के लिए पहुंच रहा है। इस अवसर पर, नांदनी, महाराष्ट्र में विराजित ससंघ से 2025 का चातुर्मास टीकमगढ़ में होने की मंगल कामना के साथ निवेदन किया जाएगा।













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