समाचार

उत्तम आर्जव धर्म पर किया भगवान का अभिषेक : मन की सरलता का नाम ही आर्जव है


शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के आरम्भ पर तीसरा दिन शाश्वत पर्व दशलक्षण के तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। सर्व प्रथम मूलनायक शान्तिनाथ भगवान एवं श्री महावीर भगवान अभिषेक चार महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया lपढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट…


आगरा। शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के आरम्भ पर तीसरा दिन शाश्वत पर्व दशलक्षण के तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। सर्व प्रथम मूलनायक शान्तिनाथ भगवान एवं श्री महावीर भगवान अभिषेक चार महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया l इंद्र श्रावक श्रेष्ठी राकेश जैन, रजनी जैन, शंशाक जैन अक्षिता जैन, ईशान इंद्र श्रावक श्रेष्ठी मनोज जैन पीयूष जैन प्रेमलता जैन, सनत कुमार और माहेन्द्र इंद्र श्रावक श्रेष्ठी सुरेश जैन आर एम पद्मा जैन व श्रावक श्रेष्ठी सुभाष चन्द्र जैन राकेश जैन, अभिषेक जैन थे l

दोनों इंद्र श्रावक श्रेष्ठी निर्मल जैन शेखर एन्क्लेव व श्रावक श्रेष्ठी महेश चंद्र जैन, मोहित जैन लाल बाग व यज्ञनायक परिवार से श्री प्रखर जैन सेक्टर छह ई थे। सभी इन्द्र गर्भ ग्रह में से दो भगवान श्री को अष्ट प्रातिहार्य के साथ लेकर आए और ‌ पांडुक शिला पर विराजमान किया। सभी आठों इंद्रौ ने प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त किया। सभी शेष महानुभावों ने पांडुक शिला पर विराजमान भगवान का अभिषेक किया। उपरांत आठों इंद्रौ द्वारा शांति धारा भी की गई। अभिषेक के उपरांत आरती व संगीत मय पूजन कराने की सभी क्रियाएं मथुरा चौरासी से पधारे श्री शुभम जैन शास्त्री जी ने कराई। पंडित शुभम जैन शास्त्री जी ने बताया कि मन ,वचन ,काय लक्षण योग की सरलता व कुटिलता का अभाव उत्तम आर्जव धर्म हैं। जो विचार हृदय में स्थित हैं ,वही वचन में कहता हैं और वही बाहर फलता हैं ,यह आर्जव धर्म हैं। डोरी के दो छोर पकड़ कर खींचने से वह सरल होती हैं ,उसी तरह मन में से कपट दूर करने पर वह सरल होता हैं अर्थात मन की सरलता का नाम आर्जव है।

जो संसार से भयभीत साधु सैकड़ों कप्तान रूप नदियों में स्नान करने वाले शत्रुओं के द्वारा ठगा जाकर के भी तथा स्वयं माया व्यवहार में कुशल होकर भी यहाँ शरीर ,वचन और मन की कुटिलता को प्राप्त नहीं होता उसके निर्मल आर्जव धर्म होता हैं ,ऐसा गणधर देवादि बताते हैं। जो अपने अपराधों को नहीं छिपाता,व्रतों में लगे अतिचारों की निंदा -गर्हा करता हैं और प्रायश्चित के द्वारा उनकी शुद्धि करता हैं वह आर्जव धर्म का धारी हैं। जो मुनि कुटिल विचार नहीं करता ,कुटिल कार्य नहीं करता और कुटिल बात नहीं बोलता तथा अपने दोष नहीं छिपाता ,उसके उत्तम आर्जव धर्म होता हैं। जो मनस्वी प्राणी कुटिलभाव व मायाचार रूप परिणामों को छोड़कर शुद्ध हृदय से चारित्र पालन करता हैं उसके नियम से तीसरा आर्जव धर्म होता हैं।

ये रहे मौजूद

श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन समिति के विजय जैन निमोरब, मगन कुमार जैन, महेश चंद्र जैन, अरुण जैन, अनिल आदर्श जैन,हेमा जैन, सतीश जैन, राकेश जैन पेंट, मनोज जैन, राकेश जैन, मोहित जैन,आलोक जैन, दीपेश जैन, चन्दन जैन, प्रशांत जैन, आशीष जैन, अनन्त जैन, विपिन जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था। मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 11 सितबंर को उत्तम शौच धर्म की पूजा एवं अभिषेक और शाम को बजबाहु का वैराग्य का नाटक मंचन होगा l

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page