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उत्तम क्षमा पर्व मनाया गया : क्षमा कायरता नहीं, बड़प्पन है


आगरा शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के आरम्भ पर प्रथम दिन शाश्वत पर्व दशलक्षण के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म के रूप में मनाया गया। सर्व प्रथम मूल नायक भगवान श्री शांतिनाथ जी का अभिषेक 4 महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया l पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट…


आगरा। आगरा शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के आरम्भ पर प्रथम दिन शाश्वत पर्व दशलक्षण के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म के रूप में मनाया गया। सर्व प्रथम मूल नायक भगवान श्री शांतिनाथ जी का अभिषेक 4 महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया l इन सभी इंद्रों द्वारा रजत मुकुट और माला धारण कर रजत झारियौं से यह क्रमशः सौधर्म इंद्र श्रावक श्रेष्ठी सतीश चंद्र मोहित जैन सेक्टर छह,ईशान इंद्र महायज्ञ नायक परिवार श्रावक श्रेष्ठी सुदीप जैन रियांश जैन लाल बाग, सनत कुमार इंद श्रावक श्रेष्ठी विनोद जैन सन्नी जैन सेक्टर तीन,व माहेन्द्र श्रावक श्रेष्ठी प्रवीण कुमार जैन निशांत जैन सेक्टर दस,इन चारों इंद्र ने क्रमशः दो भगवान को पांडुक शिला पर विराजमान किया।

सहायक इंद्र श्रावक श्रेष्ठी सुजीत जैन सेक्टर सात व श्रावक श्रेष्ठी श्री यतेन्द्र जैन, सहायक इंद्र श्रावक श्रेष्ठी श्री सिद्धार्थ जैन ठेकेदार सेक्टर तीन व यज्ञनायक परिवार से श्रावक श्रेष्ठी अनंत जैन निमोरब रहे। पांडुक शिला पर विराजमान भगवानों का लगभग सौ इंद्रौ ने अभिषेक करने का पुण्य अर्जित किया। अभिषेक शांति धारा करने के बाद आरती की गई। उपरांत संगीत मय पूजन किया गया। विधि विधान की सभी क्रियाएं श्रमण ज्ञान भारती मथुरा से पधारे श्री शुभम शास्त्री जी आदि विद्वानों ने कराई। महती धर्म प्रभावना हुई।

पंडित शुभम जैन शास्त्री जी ने बताया कि क्षमा कायरता नहीं, बड़प्पन है। उत्पात कायरता है क्योंकि उत्पाती व्यक्ति अपने अन्तर में उठने वाले बैर, क्रोध एवं अहंकार आदि शत्रुओं के समक्ष अपने घुटने टेक चुका होता है। आत्म विजेता कभी उत्पात नहीं कर सकता, अहंकारी व क्रोधी किसी को माफ नहीं कर सकता। क्षमाभाव आत्म विजय का प्रतीक है। शिशुपाल की सौ गलतियों को श्री कृष्ण ने क्षमा कर दिया। ईसा मसीह ने कहा हे प्रभु उन लोगों को क्षमा कर देना, जिन्होंने मुझे क्रॉस पर लटकाया है। प्रभु राम ने कैकयी के अपराध को उदारता से माफ कर दिया। भगवान महावीर स्वामी ने गोशालक की शरारतों को समता से सहा व उसे क्षमा देकर प्रभुत्व का परिचय दिया। स्वामी दयानंद ने जहर देने वाले के प्रति भी मन में वैर-भाव का जहर पैदा नहीं होने दिया। ऐसे एक-दो नहीं अनेक उदाहरण मिल जाएंगे। क्षमा की उपयोगिता को सभी महापुरुषों ने स्वीकारा है, किन्तु महावीर स्वामी ने इसे और ज्यादा महिमा-मण्डित किया है। जैन धर्म का सर्वप्रमुख पर्व सम्वत्सरी महापर्व है, जिसे क्षमापर्व भी कहा गया है क्योंकि इस दिन का संदेश है कि जिस किसी भी व्यक्ति के प्रति मन में वैर-विरोध है, उससे क्षमायाचना करके अपना व दूसरे का बोझ उतार दें।

नफरत का तेजाब हमारे ही शरीर व दिमाग में रहकर हमें ही सड़ाता रहता है, सताता है। इसीलिए जब हम किसी को माफ करते हैं, तो वास्तव में खुद को ही माफ करते हैं क्योंकि इस तरह हमारे दिमाग से दुर्विचारों का बोझ उतरता है व हमें शांति की प्राप्ति होती है। श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन समिति के अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब, मगन कुमार जैन, महेश चंद्र जैन, अरुण जैन, अनिल आदर्श जैन,सतीश जैन,हेमा जैन, राकेश जैन पेंट, मनोज जैन, राकेश जैन, राजेंद्र जैन, जितेश जैन, वैभव जैन, मोहित जैन, प्रशांत जैन, आशीष जैन, विपुल जैन, सिद्धार्थ जैन, अनन्त जैन,मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था। वहीं 9 सितंबर को सुबह 7:30 बजे से उत्तम मार्दव धर्म की पूजा एवं अभिषेक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।

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