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मुरैना बड़ा जैन मंदिर में साधनारत थीं : जैन साध्वी गुणनंदिनी माताजी की हुई संलेखना समाधि


नगर में चातुर्मासरत 98 वर्षीय जैन साध्वी आर्यिका गुणनंदनी माताजी का संलेखना पूर्वक समाधि मरण हुआ। मुरैना नगर के दर्जी गली दत्तपुरा निवासी सोहनलाल जैन की धर्मपत्नी विद्यावती जैन ने 08 अगस्त 2008 को आचार्य श्री विवेकसागर जी महाराज से सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण की थी। पढ़िये मनोज जैन नायक की रिपोर्ट… 


मुरैना। नगर में चातुर्मासरत 98 वर्षीय जैन साध्वी आर्यिका गुणनंदनी माताजी का संलेखना पूर्वक समाधि मरण हुआ। मुरैना नगर के दर्जी गली दत्तपुरा निवासी सोहनलाल जैन की धर्मपत्नी विद्यावती जैन ने 08 अगस्त 2008 को आचार्य श्री विवेकसागर जी महाराज से सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण की थी। तभी से वे जैन साध्वी क्षुल्लिका विगुणमति माताजी के रूप में संयम की साधना कर रहीं थी। अभी हाल ही में उनका स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण वे मुरैना बड़ा जैन मंदिर में साधनारत थीं।

पूज्य जैन साध्वी ने अपना अंतिम समय निकट जानते हुए मुरैना में चातुर्मासरत आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के शिष्य युगल मुनिराज मैं मुनिश्री शिवानंद जी महाराज, मुनिश्री प्रश्मानंद महाराज से आर्यिका दीक्षा देने का निवेदन किया। युगल मुनिराजों ने पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के निर्देशानुसार उन्हें आर्यिका दीक्षा प्रदान की। युगल मुनिराजों ने आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के निर्देशानुसार आर्यिका दीक्षा के सभी संस्कार करते हुए आर्यिका श्री 105 गुणनंदिनी नामकरण किया । आर्यिका दीक्षा संस्कारों के तीन घंटे पश्चात महामंत्र णमोकर एवं श्री जिनेंद्र प्रभु की स्तुति सुनते हुए पूज्य आर्यिका श्री गुणनंदिनी माताजी की समाधि हो गई।

पूज्य माताजी के समाधि मरण के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को डोले में विराजमानकर भव्य शोभायात्रा निकाली गई । शोभायात्रा नगर भ्रमण करती हुई जैन बगीची मुरैना स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन नसियां जी जैन मंदिर पहुंची। वहां पर पूर्ण संस्कारों के साथ माताजी का अंतिम संस्कार किया गया। डोला यात्रा में बहुतायत संख्या में साधर्मी बंधु, माता बहिनें एवम युवा साथी श्री जिनेंद्र प्रभु का गुणगान करते हुए चल रहे थे।

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