जैन युवा चेतना मंच के माध्यम से लगातार दो घंटे तक 15 साल से 35 वर्ष की उम्र के इंदौर के विश्वविद्यालय तथा बाहर के बच्चों ने अपनी अपनी समस्याओं को परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी के समक्ष रखा। मुनि श्री ने उनको वात्सल्य पूर्वक सुना और उनकी समस्याओं का समाधान किया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। जैन युवा चेतना मंच के माध्यम से लगातार दो घंटे तक 15 साल से 35 वर्ष की उम्र के इंदौर के विश्वविद्यालय तथा बाहर के बच्चों ने अपनी अपनी समस्याओं को परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी के समक्ष रखा। मुनि श्री ने उनको वात्सल्य पूर्वक सुना और उनकी समस्याओं का समाधान किया एवं भावनायोग के माध्यम से इस मुकाम पर पहुंच कर भावनायोग को प्रमोट किया। प्रवक्ता अविनाश जैन ने कहा कि लगभग पांच हजार छात्र- छात्राओं ने इसमें भाग लिया।
युवक-युवतियों ने अपने प्रश्न किये। आयुषी जैन के प्रश्न के जवाब में मुनि श्री ने कहा कि आज के समय में मां-बाप के प्रति श्रद्धा नहीं बची। टकराव का कारण बना है। कई छात्र एवं छात्राओं ने मानसिक तनाव की बातों को भी रखा। मुनि श्री ने युवक युवतियों को प्रेरणा देते हुये कहा कि आप लोग यदि आप जीवन में सफलता चाहते हो तो अपना पुण्य बढ़ाइये। मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक क्रिया कलाप को बढ़ाइये। धर्मिक क्रिआओं में नहीं पड़ सकते तो कम से कम अधर्म को न तो खुद करें और न ही किसी को करने दें। किसी भी क्षेत्र में हमारी प्राथमिकता बाधक नहीं बनती लेकिन यदि धर्म के साथ यदि आप जुड़कर करोगे तो उसका आनंद आएगा। उन्होंने बच्चों से कहा कि खुद के निर्णय खुद मत लो।
अपने से अनुभवी व्यक्ति की प्रेरणा लेकर आगे बड़ो। फास्ट यू अकादमी आई ए एस की तैयारी कर रही बेटियों ने कहा कि हम अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं तो हमारे ऊपर घर का भी प्रेशर रहता है। इसका जवाब देते हुए मुनि श्री ने कहा कि सभी बच्चे सिलेक्ट नहीं होते। लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही अपने ध्येय को आगे बढ़ाइये। यदि आप प्री टेस्ट में नहीं निकल पा रहे है तो तनाव मत लो। अपने परिवार की बात पर ध्यान दो। अपने जीवन पर निर्णय लेना चाहिये।













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