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धर्मसभा में दिए प्रवचन : आपको प्रवृत्ति वाला धर्म नहीं प्रकृति वाला धर्म करना है- मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज


छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आपको प्रवृत्ति वाला धर्म नहीं, प्रकृति वाला धर्म करना है । हम सभी प्रवृत्ति वाला धर्म करते हैं। आप प्रतिदिन मंदिर जी में घंटा बजाकर अंदर जाते हैं, दर्शन करते हैं ,पूजा – पाठ, अभिषेक करते हैं ,शांति धारा भी करते हैं, किंतु यह सभी आप भाव शुद्धि के बिना ही करते हो। आपको प्रभु पर श्रद्धा नहीं होती। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आपको प्रवृत्ति वाला धर्म नहीं, प्रकृति वाला धर्म करना है । हम सभी प्रवृत्ति वाला धर्म करते हैं। आप प्रतिदिन मंदिर जी में घंटा बजाकर अंदर जाते हैं, दर्शन करते हैं ,पूजा – पाठ, अभिषेक करते हैं ,शांति धारा भी करते हैं, किंतु यह सभी आप भाव शुद्धि के बिना ही करते हो। आपको प्रभु पर श्रद्धा नहीं होती ।आपको प्रतिमा में आदमी दिखाई देता है। प्रतिमा पर लिखी प्रशस्ति को पढ़कर आप कहते हो यह फलां की प्रतिमा है, यह वेदी फलां ने बनवाई है।

अपनी दृष्टि निर्मल करो। प्रतिमा में भगवान को देखो। बरसों से मंदिर जाते हो, साधना करते हो, किंतु दृष्टि का दोष मीटा नहीं। बाहर के जगत में तो तुम धर्मात्मा हो किंतु अंतरंग से तुम वैसे नहीं हो। तुम्हारा धर्म दयामयी होना चाहिए । व्यक्ति के विकास में कान की बड़ी भूमिका है । साधु का प्रवचन आपके अंदर 5 मिनट भी नहीं टिकता। उन्होंने कहा कि तुम्हारे जीवन का हर दिन पर्युषण पर्व होना चाहिए। ब्रह्मचर्य का मतलब वह नहीं , जो तुम समझते हो। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि 8 अगस्त 2013 को रामटेक में 24 महाराज दीक्षित हुए थे। मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी एवं मुनि श्री निसर्ग सागर जी महाराज की दीक्षा भी उसी दिन हुई थी। हम उस दिन को दीक्षा – दिवस के रूप में यहां शालीनता के साथ मनाएंगे। 10 – 11 अगस्त को हम 65 सैनिकों का सम्मान, परम वीर चक्र प्राप्त राघवेंद्र सिंह यादव जी के पावन सानिध्य में करेंगे।

उसी दिन हम मोक्ष – कल्याणक दिवस भी मनाएंगे। मुनिवर कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने देश के लिए वफादार नहीं है वो अपने धर्म के प्रति भी वफादार नहीं हो सकता। प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से सभी श्रावक- श्राविकाओं ने पूजन की। दानदाताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। नवीन जैन सपरिवार गुड़गांव से यहां पधारे। पदाधिकारियों ने उनको भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मनोज बाकलीवाल, मनीष नायक, सचिन जैन सतीश डबडेरा, सतीश जैन, शिरीष अजमेरा, राजेश जैन लॉरेल, आनंद जैन, आलोक बंडा, आदि विशेष रूप से मौजूद थे। धर्म सभा का सफल संचालन भरतेश जी बड़कुल ने किया। मुनि संघ के प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे,आचार्य भक्ति 7:00 बजे एवं शांति धारा मंदिर जी में होते हैं, तत्पश्चात सुबह 8.30 बजे से आचार्य श्री जी की पूजन, 9:00 बजे से प्रवचन, दलाल बाग में होते हैं। तत्पश्चात 10:00 बजे आहार चर्या होती है।

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