कहते है ग्रह ही राज्य देते है और ग्रह ही राज्य हर लेते हैं ।सभी चराचर ग्रहों के अधीन है। अर्थात पृथ्वी पर कब सूखा, कहाँ अति वर्षा ,भूकंप आदि का अनुमान ज्योतिष में रूचि रखने वाले समय -समय पर लगाते रहते है।29 अप्रेल से शुक्र ग्रह पूर्व में अस्त चल रहे हैं जो 05 जुलाई को पश्चिम दिशा में उदय होंगे । 07 मई से गुरु ग्रह पश्चिम में अस्त होंगे जो 01 जून को पूर्व में उदय होंगे। शुक्र और गुरु ग्रह ने शुभ कार्यों जैसे विवाह,ग्रह प्रवेश आदि को प्रभावित कर दिया। पढि़ए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट ……
मुरैना । कहते है ग्रह ही राज्य देते है और ग्रह ही राज्य हर लेते हैं ।सभी चराचर ग्रहों के अधीन है। अर्थात पृथ्वी पर कब सूखा, कहाँ अति वर्षा ,भूकंप आदि का अनुमान ज्योतिष में रूचि रखने वाले समय -समय पर लगाते रहते है।
29 अप्रेल से शुक्र ग्रह पूर्व में अस्त चल रहे हैं जो 05 जुलाई को पश्चिम दिशा में उदय होंगे । 07 मई से गुरु ग्रह पश्चिम में अस्त होंगे जो 01 जून को पूर्व में उदय होंगे। शुक्र और गुरु ग्रह ने शुभ कार्यों जैसे विवाह,ग्रह प्रवेश आदि को प्रभावित कर दिया। मई,जून माह में सबसे ज्यादा विवाह होते थे। इस बार एक भी इन की वजह से नही होंगे। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने कहा कि इस वार मई, जून माह में ग्रहों के परिणाम भारत के कई राज्यों सहित कई देशों के लिए ठीक नहीं है। वृष राशि में 04 जून को पंचग्रहि योग बनेगा, जो 07 जून तक रहेगा। इस समय 15 मई से 14 जून तक त्रिग्रही, चर्तुग्रही योग तो रहेगा ही आगे आषाढ़ मास का कृष्ण पक्ष 13 दिनों का रहेगा । 13 दिन का पक्ष रहना भी पृथ्वी के लिए अच्छा नहीं है ,यह किसी देश में युद्ध के आसार की संभावना तेज करता है।
समुद्र में तूफान, चक्रवात और सुनामी आने के योग
14 मई से सूर्योदय कुंडली वृष में एक माह चलेगी, भारत की लग्न कुंडली भी यही है। अत: ऐसे में वृष राशि भारत के पूर्वी राज्य इन पंचग्रह योग की चपेट में आ रहे है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम राज्य पूर्वी राज्य की श्रेणी में आते है। इसके अलावा बंगाल, उड़ीसा, बिहार और झारखंड भी भारत के पूर्वी राज्य है।15 मई से 20 जून के बीच की अवधि भारत के पूर्वी राज्यों और पश्चिमी राज्यों में विशेष रूप से पश्चिमी राज्यों के लिए कष्टकारी बनी हुई है। स्वतंत्र भारत की कुंडली के अनुसार भारत के सप्तम भाव पश्चिमी राज्य की राशि वृश्चिक है। वृश्चिक राशि जल तत्व राशि है और भारत के पश्चिमी राज्यों के निकट समुद्र भी है। ऐसे में समुद्र में तूफान, चक्रवात, सुनामी आने के योग इस समय में विशेष रूप से बन रहे है। वृश्चिक राशि का जल तत्व पर प्रभाव डालने वाले ग्रहों में शनि, कुम्भ वायु तत्व राशि, राहु, मीन राशि जलतत्व, वृषभ राशि भूमि तत्व में सूर्य, शुक्र, बुध, गुरु, सूर्य और चंद्र , मंगल मेष राशि अग्नि तत्व का प्रभाव रहेगा।
शनि से पांच ग्रहों की युति का केंद्र योग और राहु ग्रह से त्रिकादश योग रहेगा। जल तत्व राशियों को जब वायु तत्व राशियों का सहयोग प्राप्त होता है तो समुद्री तूफान आने का ज्योतिष अनुमान पुष्ट होता है और जब-जब भूकंप आता है, तब तब समुद्री तूफान आने के योग भी बनते हैं। वृष राशि भूमि तत्व राशि है, इस राशि के साथ पांच ग्रहों की युति भूमि तत्व को पीड़ित कर पूर्वी राज्यों में भूकंप आने की संभावनाएं बना रही है। पंचग्रह युति ,गोचर योग पर गोचर के केतु ग्रह की नवम् दृष्टि भी आ रही है। इससे भूमि खिसकने के योग की पुष्टि हो रही है।
पडोसी देशों से रहे सावधान
यही स्थिति वैश्विक स्तर पर भी देखी जा सकती है। भारत के पूर्वी राज्यों में रिक्टर स्केल पर 5.0 से 6.0या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप के आने के योग बन रहे है। पश्चिमी राज्यो में समुद्री चक्रवात के कारण जनहानि का योग भी जून,जुलाई माह में बन रहा है।ज्योतिष शास्त्र के आधार पर 15 मई के बाद से लेकर 20 जून के मध्य का समय और आषाढ़ कृष्ण पक्ष 13 दिनों का होने से 20 जुलाई तक भारतीय और वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक आपदाओं का योग निर्मित होता है।वृष राशि पूर्वी क्षेत्र उत्तरी क्षेत्र, पडोसी देशों की दिशा पर राहु और मंगल दो अशुभ ग्रहों का प्रभाव आने से पडोसी देशों पाकिस्तान और चीन से भी सावधान रहना चाहिए।













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