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नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान संपन्न पवित्र मन से की गई भक्ति ही मोक्ष प्राप्ति का साक्षात कारण – अधिष्ठाता जयकुमार जैन


श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर, महारानी फार्म, जयपुर में 17 मार्च से 25 मार्च तक सिद्धों की आराधना हेतु 9 दिवसीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान में कुल 2040 अघ्र्य समर्पित होकर 25 मार्च को विश्व शांति महायज्ञ के साथ पंडि़त संजय शास्त्री सांगानेर जयपुर के निर्देशन में उत्साह व भक्ति पूर्वक संपन्न हुआ। पढि़ए पूरी रिपोर्ट… 


जयपुर। श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर, महारानी फार्म, जयपुर में 17 मार्च से 25 मार्च तक सिद्धों की आराधना हेतु 9 दिवसीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान में कुल 2040 अघ्र्य समर्पित होकर 25 मार्च को विश्व शांति महायज्ञ के साथ पंडि़त संजय शास्त्री सांगानेर जयपुर के निर्देशन में उत्साह व भक्ति पूर्वक संपन्न हुआ। मंदिर प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा के अनुसार प्रतिदिन श्रीजी के अभिषेक, शांति धारा, नित्य नियम की पूजा, विधान पूजा आदि सांयकाल आरती, प्रवचन, भक्तामर पाठ, भजन संध्या, विनतियों के आदि विभिन्न कार्यक्रम सोधर्म इंद्र अशोक पापड़ीवाल-संतोष गंगवाल परिवार व विधान में सम्मिलित इंद्र- इंद्राणियों द्वारा किए गए।

युवा परिषद की राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने अवगत कराया कि 25 मार्च को श्री दिगंबर जैन श्रवण संस्कृति संस्थान सांगानेर से अधिष्ठाता जयकुमार जी मुजफ्फरनगर, प्राचार्य अरूण कुमार जी ब्यावर, संस्थान के निदेशक शीतल चन्द जैन जयपुर उपस्थित हुए, मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा, उपाध्यक्ष अरूण शाह, मंत्री राजेश बोहरा, संयुक्त मंत्री मुकेश सोगानी, कोषाध्यक्ष राकेश छाबड़ा सदस्य गजेंद्र छाबड़ा आदि पदाधिकारियों के साथ सोधर्म इन्द्र अशोक पापड़ीवाल, संतोष गंगवाल आदि द्वारा श्रवण संस्कृति संस्थान के वरिष्ठ विद्वान पदाधिकारियों का समाज की ओर से सम्मान किया गया ।

 देव दर्शन विधान है मोक्ष का मार्ग 

इस अवसर पर निदेशक शीतल चंद जैन जयपुर ने कहा कि सिद्ध बनने के लिए सिद्ध चक्र विधान संविधान है, यह विधान एक नहीं पांच-पांच विधानों का महाविधान है। अधिष्ठाता जयकुमार जी जैन मुजफ्फरनगर ने कहा कि हम सब भाग्यशाली हैं जो देव दर्शन हो रहा है, जैनवाणी सुनने का लाभ मिल रहा है। जैनवाणी जिन्होंने सुनी वह भव्य प्राणी है। शुद्ध व पवित्र मन से की गई भक्ति मोक्ष प्राप्ति का साक्षात् कारण है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जो प्राणी नित्य देव दर्शन विधान जैसे कार्य करते हैं वे निश्चित रूप से मोक्ष मार्ग की ओर प्रशस्त हो रहे हैं।

प्राचार्य अरुण कुमार जी ने कहा कि भगवान का नाम उच्चारण व कथा करने से संसार के समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं, उन्होंने विधान में बैठने वाले सभी श्रावक-श्राविकाओं के पुण्य की कोटि-कोटि अनुमोदन, प्रशंसा की। विधानाचार्य संजय शास्त्री ने कहा कि गायत्री नगर में बैठने वाले सभी महानुभावों ने सांगानेर संस्थान द्वारा किये जा रहे सामाजिक व धार्मिक कार्यों की प्रशंसा की। इस अवसर पर विद्वान पं पदम जी काला भीलवाड़ा से विधान में सम्मिलित होकर दिशा निर्देश प्रदान किए यह हम सबका गौरव है। तत्पश्चात विधानाचार्य संजय शास्त्री ने विश्व शांति महायज्ञ प्रारंभ कर रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से पूर्णाहुति कराई गई। विधान में गायत्री नगर समाज के साथ विभिन्न कॉलोनियों व शहरों से लगभग 250 से अधिक श्रावक -श्राविकाओं ने विधान में बैठकर पुण्यार्जन प्राप्त किया।

धर्म सभा का कुशल संचालन प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अरुण शाह ने करते हुए बताया कि महायज्ञ व विधान संपन्न होने के पश्चात होली के पुनीत अवसर पर स्नेह एवं प्रेम की तिलक होली मनाई गई। सभी ने आपस में केसर के तिलक लगाए। मंत्री राजेश बोहरा एवं अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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